गलत इलाज करने पर डॉक्टरों व अस्पतालों पर 25 लाख का जुर्माना
दिल्ली राज्य उपभोक्ता फोरम ने दिया कड़ा आदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महिला को गलत सलाह देने और गलत उपचार करने पर दिल्ली राज्य उपभोक्ता फोरम ने आरोपी डॉक्टरों व अस्पतालों पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अपने निर्णय में फोरम के सदस्य ओपी गुप्ता ने कहा कि डॉक्टरों को पैसा कमाने के लिए गैर-जरूरी और महंगी जांच करवाने के लिए मरीजों को गुमराह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उपभोक्ता फोरम ने पुष्पांजलि हेल्थकेयर दिल्ली, गाजियाबाद की डॉ. श्रद्धा जैन, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट दिल्ली, डॉ. नीना सिंह और फोर्टिस ला फेमे सेंटर फॉर वीमन को अपने निर्णय में लापरवाही का दोषी माना है। पीड़ित महिला के पति ने फोरम को दी शिकायत में बताया था कि नवंबर 2011 में उनकी पत्नी को माहवारी के दौरान तेज दर्द होने पर पुष्पांजलि अस्पताल की डॉ. श्रद्धा जैन से संपर्क किया गया। इलाज के दौरान डराया गया कि पत्नी किसी गंभीर रोग की चपेट में हैं।
अल्ट्रासाउंड करवाने के बाद उनके कई और महंगे टेस्ट करवाए गए। पैथोजन असिस्टेड मॉलिक्यूलर पैटर्न (पीएएमपी) टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर कहा गया कि महिला को इडोमीट्रम टीबी है। महिला और उसके परिवार के लिए यह सदमे जैसा था, क्योंकि वह पूरी तरह से स्वस्थ थी। शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि उन्हें तत्काल बच्चा पैदा करने का सुझाव यह कहते हुए दिया गया कि बाद में वे बच्चा पैदा करने के योग्य नहीं रहेंगे। मार्च 2011 में 28 साल की उनकी पत्नी गर्भवती हुई। इसी दौरान उन्हें टीबी की दवाएं दी गईं। उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।
टीबी जांच के लिए जो टेस्ट किया वो बैन था
शिकायतकर्ता ने फोरम को बताया कि मानसिक रूप से परेशान होकर उन्हाेंने एक अन्य डॉक्टर को यह केस दिखाया, जिन्हाेंने बताया कि इडोमीट्रम टीबी की जांच के लिए पीएएमपी सही टेस्ट नहीं है, इसे डब्ल्यूएचओ बैन कर चुका है। यह भी सामने आया कि गर्भस्थ शिशु का विकास नहीं हो रहा है, क्योंकि वे टीबी की दवाएं ले रही थीं। अंतत: गर्भस्थ शिशु को भी बचाया नहीं जा सका।
इसके बाद उन्हाेंने फोर्टिस ले-फेम अस्पताल की डॉ. नीना सिंह से इलाज करवाया। लेकिन यहां भी गलत सर्जरी के चलते वे हमेशा के लिए निसंतान होते-होते बचे। उन्हाेंने डॉ. सिंह के अस्पताल से संपर्क किया तो उसने भी कोई मदद नहीं की, बल्कि डॉक्टर की ही बात मानने के लिए कहा। परिणाम यह हुआ कि पीड़ित महिला आज एशरमैन सिंड्रोम से पीड़ित है। बड़ी मुश्किल से एक अन्य चिकित्सक की सहायता से वे बच्चा पैदा कर सके।
45 दिन में हर्जाना दें दोषी डॉक्टर
फोरम ने दोनों चिकित्सकों और अस्पतालों को लापरवाही का दोषी माना। उन्हें याची को अस्पताल, जांच व दवाओं के खर्च का पांच लाख रुपये अदा करने के लिए कहा गया। 10-10 लाख हर्जाना भी पीड़िता को देने के लिए कहा गया है। दोषियों को कानूनी खर्च के 50 हजार रुपये भी अदा करने को कहा है। 45 दिन में यह रकम नहीं चुकाते हैं तो उन्हें भुगतान की तिथि पर नौ फीसदी ब्याज भी चुकाना होगा।