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Delhi NCR News: बारह कॉलेज के शिक्षकों का फूटा गुस्सा
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नियमितीकरण और नियुक्तियों के लिए दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
नई सिल्ली। दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित और दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 कॉलेजों में लंबित शिक्षक नियुक्तियों, एडहॉक एवं अस्थायी शिक्षकों के नियमितीकरण और ईडब्ल्यूएस पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग को लेकर शुक्रवार को शिक्षकों का गुस्सा फूटा। शिक्षक संगठन एएडीटीए के नेतृत्व में शिक्षकों ने डीयू के आर्ट्स फैकल्टी गेट पर धरना दिया। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
एएडीटीए अध्यक्ष डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि नमिता खरे केस में दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला आने के बावजूद 12 कॉलेजों के एडहॉक शिक्षकों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। इससे शिक्षकों के बीच भारी तनाव, असुरक्षा और हताशा का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में नई सरकार ने पिछले एक वर्ष में इस गंभीर मुद्दे को सुलझाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। उन्होंने मांग की कि सभी पदों को एक्स पोस्ट फैक्टो स्वीकृति देकर नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। साथ ही ईडब्ल्यूएस श्रेणी के एवज में मिलने वाले अतिरिक्त पद भी जल्द जारी किए जाएं ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई सिल्ली। दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित और दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 कॉलेजों में लंबित शिक्षक नियुक्तियों, एडहॉक एवं अस्थायी शिक्षकों के नियमितीकरण और ईडब्ल्यूएस पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग को लेकर शुक्रवार को शिक्षकों का गुस्सा फूटा। शिक्षक संगठन एएडीटीए के नेतृत्व में शिक्षकों ने डीयू के आर्ट्स फैकल्टी गेट पर धरना दिया। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
एएडीटीए अध्यक्ष डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि नमिता खरे केस में दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला आने के बावजूद 12 कॉलेजों के एडहॉक शिक्षकों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। इससे शिक्षकों के बीच भारी तनाव, असुरक्षा और हताशा का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में नई सरकार ने पिछले एक वर्ष में इस गंभीर मुद्दे को सुलझाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। उन्होंने मांग की कि सभी पदों को एक्स पोस्ट फैक्टो स्वीकृति देकर नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। साथ ही ईडब्ल्यूएस श्रेणी के एवज में मिलने वाले अतिरिक्त पद भी जल्द जारी किए जाएं ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।
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