थमा जरूर है दिल्ली सरकार बनाम नौकरशाह विवाद, लेकिन अब भी सुलग रही हैं चिंगारियां
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनके सहयोगियों के राजनिवास पर नौ दिन के धरने के बाद भले ही दिल्ली सरकार बनाम नौकरशाह विवाद कुछ थम गया हो, लेकिन चिंगारियां अभी भी सुलग रही हैं।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों को बातचीत का न्योता तो दे दिया, लेकिन मिलना उचित नहीं समझा और इलाज के लिए बंगलूरू रवाना हो गए। अब अधिकारी स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और उनमें आक्रोश भी बना हुआ है।
यही कारण है कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मिलने से इनकार कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री विवाद का स्थायी हल चाहते, तो अधिकारियों से कुछ घंटे की मीटिंग कर सकते थे।
मुख्य सचिव से कथित मारपीट के मामले के बाद से ही चार माह से अधिकारी सरकार के साथ असहयोग पर थे। सरकार का कोई भी काम सिरे से न चढ़ने के कारण ही धरनों का दौर चला।
उधर, मामला हाईकोर्ट में पहुंचने व अदालत की कड़ी टिप्पणी कि क्या आप किसी के घर में धरना दे सकते हैं, के बाद सरकार को भी लगने लगा कि कहीं उनके खिलाफ निर्णय न आ जाए। सरकार ने बातचीत की पहल की। उधर अधिकारियों को भी लगा कि मामले में पक्ष बनने के बाद अदालत की किसी भी टिप्पणी से बचने के लिए सुलह जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन अधिकारियों से नहीं मिले और स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर अधिकारियों को उपमुख्यमंत्रियों से मिलने का तर्क रख दिया।मुख्यमंत्री ने बंगलूरू जाने से पहले कई मीटिंग कीं और आदेश दिए, लेकिन अधिकारियों से मिलने के लिए समय नहीं निकाला।
अधिकारियों में इस मुद्दे को लेकर रोष है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्थायी हल चाहते, तो अधिकारियों से कुछ घंटे की मीटिंग कर सकते थे, लेकिन उनके रवैये से वे निराश हैं और यही कारण है कि उनके एसोसिएशन ने उपमुख्यमंत्री से मिलने से इनकार कर दिया।
उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री उनसे एक बार मिल लेते, तो वे बाद में उपमुख्यमंत्री से भी बात कर विवाद का निपटारा कर सकते थे।