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भारत-पाक युद्ध में शहीद खैंटावास में शिलापट पहुंचा

Sat, 22 Oct 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 22 Oct 2016 12:04 AM IST
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मातृ भूमि की रक्षा का जज्बा लेकर बीएसएफ में भर्ती हुए खैंटावास निवासी कांस्टेबल शहीद दीपचंद पुत्र गंगाराम 1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मनों से लड़ने का गौरव हासिल है।

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शहीद के करीब चार साल गुजर जाने पर उनका नाम गुमनामी की सूची में दर्ज कर दिया। जिसके बाद शहीद का दर्जा देकर कपड़े, बैल्ट, टोपी, दस्तावेज परिजनों के द्वारा भेजे गए पत्र मिलें। उन्हें एक बॉक्स में बंद कर परिजनों को साैंप दिया गया।
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शहीद की याद में शुक्रवार को राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल में उनकी स्मृति में शिलापट स्तंभ का उद्घाटन तहसीलदार रणविजय यादव ने किया। नायब तहसीलदार प्रदीप सिंह, पंचायत समिति फर्रूखनगर चेयरपर्सन गीता यादव व ग्रामीण महिलाओं ने शहीद के शिलापट पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया।
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उक्त शहीद शिलापट को बीएसएफ की बटालियन 95 के हैड कंास्टेबल लालाभाई लेकर आए और सलामी दी। शहीद के शिलापट के गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों स्वागत किया। शहीद की स्मृति में ग्रमीणों ने भारत माता की जय नारे लगाए।

शहीद के भाई रघुबीर सिंह व श्योनारायण ने बताया  कि शहीद दीपचंद ने खैंटावास के स्कूल में आठवीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण की थी। दीपचंद में बचपन से ही देश भक्ति की भावना भरी थी। वर्ष 1966 में दीपचंद बीएसएफ की 25वीं बटालियन में रहे। उस समय वह करीब 18 वर्ष के ही थे। ट्रेनिंग पूरी होने पर ड्यूटी पर तैनात कर दिये।

वर्ष 1971 में पाकिस्तान ने अचानक युद्ध का ऐलान कर दिया। उस लड़ाई में दीपचंद को जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस युद्ध में देश के दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देते रहे।

दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए। उनके युद्ध समाप्ति के बाद भी अनेक सैनिक वापस नहीं लौटने पर करीब चार साल तक तलाश अभियान चलता रहा। लेकिन किसी का भी पता नहीं लग सका।

लगभग पांच साल बाद सभी को शहीद घोषित किया गया। जिसमें हरियाणा के करीब 88 जवान शामिल हैं। उनमें दीपचंद  भी शामिल थे। सरकार के आदेश पर  उनके नाम पर खैंटावास में शिलापट लगाया गया है। शहीद की मां निहाली के नाम से 80 व 101 रुपये की दो पैंशन मिलती थी। उनकी मृत्यु के बाद वह भी बंद हो गई है।


शहीद समारोह के मौके पर पूर्व चेयरमैन सरजीत यादव, पूर्व सरपंच बिरेंद्र यादव, पूर्व सरपंच विपेंद्र यादव, महावीर ढाणा, महासिंह भांगरौला, सरपंच जिलेङ्क्षसह धानावास, सुंदर यादव धानावास, मनोज यादव डाबोदा, जयसिंह, श्योनारायण, रघुबीर, सूबेदार टेकराम, प्रिङ्क्षसंपल डॉ. रणधीर ङ्क्षसह, सरपंच रेणू देवी, नरेंद्र यादव सैदपुर, निर्मला देवी, प्यारेलाल, उर्मिला सहरावत, जागृति यादव, मुन्नी देवी, राजेश कुमार, हरिसिंह, भरत ङ्क्षसह, सत्यप्रकाश, अनिमेश यादव व बलबीर सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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