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23 साल बाद दिल्ली में फिर होने जा रहा है महामुकाबला

Tue, 01 Apr 2014 04:56 PM IST
विनोद डबास/अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद डबास/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 01 Apr 2014 04:56 PM IST
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triangle muqabala in delhi elections after 23 years

लोकसभा चुनाव के इतिहास में 23 साल बाद दिल्ली में दूसरी बार त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है। 1991 के चुनाव में जनता दल ने कांग्रेस और भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी।

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अब 23 साल बाद एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी को टक्कर देने के लिए तीसरा खिलाड़ी यानी 'आप' मैदान में है।

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में AAP ने अपना ट्रेलर तो दिखा दिया है लेकिन इस चुनाव में AAP के साथ ही दोनों विरोधी दलों की भी पूरी फिल्म साफ-साफ दिखने वाली है।

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इस बार गलती नहीं दोहराएंगी बीजेपी-कांग्रेस

triangle muqabala in delhi elections after 23 years

हालांकि 1991 के चुनाव में जनता दल के उम्मीदवार एक भी सीट नहीं जीत सके थे, लेकिन सभी सातों सीटों पर कांग्रेस व भाजपा का खेल बिगाड़ने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बना दी है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव परिणाम के मद्देनजर कांग्रेस व भाजपा ‘आप’ को हल्के में नहीं ले रही है।

16वें लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली एनसीआर में 10 अप्रैल को मतदान होगा और 16 मई को मतगणना होगी। इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी की उपस्थिति कांग्रेस व भाजपा के लिए ही नहीं, बल्कि मतदाताओं के लिए भी पहेली बनी हुई है।

क्या AAP बनाएगी ये अनोखा रिकॉर्ड?

triangle muqabala in delhi elections after 23 years

किसी को भी अंदाजा नहीं है कि AAP लोकसभा चुनाव में क्या गुल खिलाएगी, मगर उसकी स्थिति वर्ष 1991 में जनता दल की स्थिति से काफी बेहतर मानी जा रही है।

अगर AAP संसदीय सीट जीतने में सफल रही तो यह दूसरा मौका होगा, जब गैर कांग्रेस व गैर भाजपा गठजोड़ दिल्ली में सीट जीतेगा। इससे पूर्व यह कारनामा 1952 के लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर किसान मजदूर प्रजातंत्र पार्टी ने किया था।

इस पार्टी की प्रत्याशी सुचेता कृपलानी ने कांग्रेस उम्मीदवार को साढ़े सात हजार वोटों से हराया था। हालांकि यह पार्टी अन्य सीटों पर कुछ खास नहीं कर सकी थी।

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आडवाणी के रथ ने बिगाड़े थे समीकरण!

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AAP दिल्ली की सभी सातों सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उसके उम्मीदवार भी काफी दमदार माने जा रहे हैं। इतना ही नहीं, AAP को विधानसभा चुनाव की सफलता से आत्मविश्वास मिला है।

नौवें लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने के साथ-साथ सत्ता हासिल करने वाले जनता दल ने 10वें लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ा था। इसका मुख्य कारण मंडल रिपोर्ट लागू करने और लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा रोकने के चलते उसका भाजपा के साथ गठजोड़ टूटना था।

इस चुनाव में जनता दल ने दिल्ली में त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी थी। राजनीतिक पंड़ितों की मानें तो जनता दल ने कांग्रेस के वोट बैंक में ज्यादा सेंध लगाई थी। उसके उम्मीदवारों ने करीब 14 प्रतिशत वोट हासिल किए थे।

इस बार बजेगा किसका बैंड?

triangle muqabala in delhi elections after 23 years

उस चुनाव में चार सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के जीत के अंतर से कहीं अधिक जनता दल के उम्मीदवारों ने वोट हासिल किए थे। उसने बाहरी दिल्ली सीट पर भाजपा को नुकसान पहुंचाया था।

हालांकि दक्षिण दिल्ली और दिल्ली सदर सीट पर जनता दल का कोई खास जादू नहीं चला था। उनकी उपस्थिति के चलते कांग्रेस को दो सीटें ही मिलीं थी, जबकि भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं।

इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी किसका बैंड बजाती है ये तो देखना दिलचस्प होगा। हालांकि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने वाली AAP दोनों ही विरोधियों को कांटे की टक्कर दे रही है।

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