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मेल सेक्स वर्कर्स और ट्रांसजेंडर्स में एड्स के मामले ज्यादा

Tue, 01 Dec 2015 01:23 AM IST
Updated Tue, 01 Dec 2015 01:23 AM IST
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Transgender and male sex workers have more cases of AIDS

भारत में एड्स के मरीजों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है, लेकिन ट्रांसजेंडर और मेल सेक्स वर्कर्स ने चिकित्सकों और नीति निर्धारकों की चिंता बढ़ा दी है।

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फीमेल सेक्स वर्कर्स और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की वजह से आने वाले एड्स के मामलों में कमी आई है, लेकिन ट्रांसजेंडर और मेल सेक्स वर्कर्स में एड्स के मामले अधिक आ रहे हैं।

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हालांकि पिछले 10 वर्षों में भारत में एड्स मरीजों की संख्या में करीब 10 लाख की कमी आई है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

एड्स मरीज बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं ये

Transgender and male sex workers have more cases of AIDS

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय रॉय ने बताया कि एड्स मरीजों की संख्या में कमी आई है, लेकिन समलैंगिक मेल और ट्रांसजेंडर एड्स मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं।


वित्त वर्ष 2013-14 तक के कार्यक्रम में लगभग 7.18 लाख महिला यौनकर्मी और लगभग 2.59 लाख समलैंगिक पुरुष उच्च जोखिम समूह में शामिल हैं।

डॉ. रॉय ने बताया कि वर्ष-2005 में जहां भारत में करीब 28 लाख लोग एड्स से पीड़ित थे, वहीं वर्ष 2012-13 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में एड्स पीड़ित मरीजों की संख्या घटकर करीब 21 लाख आ गई है।

देश में एड्स मरीजों की संख्या घटी, लेकिन

Transgender and male sex workers have more cases of AIDS

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ सोइटोलॉजी एंड प्रिवेंशन ऑन्कोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) रवि मेहरोत्रा ने बताया कि मेल सेक्स वर्कर्स और ट्रांसजेंडर ने समस्या बढ़ा दी है।


परंपरागत समूह जो भारत में एड्स के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार थे, उस समूह के लोगों में एड्स मरीजों की संख्या में जबरदस्त कमी आई है।

डॉ. मेहरोत्रा ने कहा कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से देश में ट्रीटमेंट और काउंसलिंग सेंटर बढ़ाने और अनेक तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाने की वजह से देश में एड्स मरीजों की संख्या घटाने में काफी मदद मिली है।

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भारत एड्स मरीजों की संख्या के मामले में तीसरे नंबर पर

Transgender and male sex workers have more cases of AIDS

केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्थान एड्स नियंत्रण विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष-2007 में एड्स पीड़ित महिला यौनकर्मियों का प्रतिशत 5.06 था, वह 2011 में 2.67 हो गया।


2007 में समलैंगिक पुरुषों में 7.41 प्रतिशत को एड्स था, जो 2011 में 4.43 फीसदी तक पहुंच गया। सुई से दवा इंजेक्ट कर नशा करने वालों की वजह से होने वाले एड्स की संख्या आज भी बहुत ज्यादा है और पंजाब में इसके मामले सबसे ज्यादा हैं।

भारत एड्स मरीजों की संख्या के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर आता है।

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