राजधानी के 6602 ई रिक्शे हुए जब्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में गैरकानूनी रूप से चलने वाली 6602 ई-रिक्शा को जब्त किया गया है। इसके अलावा दुर्घटना में लिप्त 114 चालकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली यातायात पुलिस ने हाईकोर्ट को उक्त जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई कर रही है और किसी भी हालत में कानून के उल्लंघन की इजाजत नहीं दी जा रही।
न्यायमूर्ति वीके शाली के समक्ष दिल्ली यातायात पुलिस के उप-आयुक्त आरेके झा ने अदालत की अवमानना मामले में दायर जबाव में यह जानकारी दी है। पुलिस की और से पेश अधिवक्ता जुबेदा बेगम ने कहा कि हाईकोर्ट ने राजधानी में ई-रिक्शा के संचालन पर 31 जुलाई को रोक लगाई थी उसके तुंरत बाद उसी दिन वायरलैस मैसेज से सभी थानों को ई-रिक्शा के सड़को पर चलने पर रोक लगाने को कहा गया था। उन्होंने इस आदेश के बाद ई-रिक्शा पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया और 114 चालकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279 के तहत मामले दर्ज किए गए है।
उन्होंने कहा 27 अक्तूबर को याचि ने अवमानना याचिका दायर कर आदेश का उल्लंघन करेन का आरोप लगाया है जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि इस याचिका के बाद पुन: सभी थानों में सर्कुलर भेज कर ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सड़को पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात कर कानून का उल्लंघन कर सड़को पर चलने वाले ई-रिक्शा चालकों पर कार्रवाई की गई।
इस कड़ी में 31 जुलाई से 25 नवंबर 14 तक कुल 6602 ई-रिक्शा को जब्त कर लिया गया है। अत: याचिका खारिज की जाए। अदालत ने हालही में अवमानना याचिका में संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) अनिल शुक्ला व परिवहन आयुक्त सतीश माथुर को अवमानना नोटिस जारी किया था। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता शाहनवाज खान ने अधिवक्ता सुग्रीव दुबे के जरिए दायर की थी।
कोर्ट ने नरमी बरतने से किया इंकार
हाईकोर्ट ने राजधानी में गैरकानूनी रूप से चलने वाली ई-रिक्शा के प्रति अपने रूख में नरमी बरतने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें जब्त ई-रिक्शा को रिलीज करने का निर्देश देने का आग्रह किया था।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ की खंडपीठ ने मंत्रालय के आवेदन पर कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि जब आपने स्वयं माना है कि ई-रिक्शा गैरकानूनी रूप से चल रहे है और यदि पुलिस ने उन्हें जब्त किया है तो हम उसे रिलीज करने का आदेश कैसे दे सकते है।
मंत्रालय की और से पेश अधिवक्ता ने तर्क रखा कि हमने ई-रिक्शा को चलाने के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है और यह 8 अक्तूबर को गजट में प्रकाशित हो चुकी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा चालक स्वयं सीधे संबंधित अथारिटी के पास अपनी रिक्शा को रिलीज करवाने के लिए जा सकते है। संबंधित अथारिटी ही इस मुद्दे पर उचित फैसला ले सकती है। खंडपीठ ने हालही में दिए फैसले में ई-रिक्शा के संचालन को गैरकानूनी ठहराते हुए उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।