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जिसे समझा दिमागी कजमोर वह निकला ट्रैफिक का फरिश्ता

Sun, 14 Sep 2014 08:12 PM IST
Updated Sun, 14 Sep 2014 08:12 PM IST
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traffic ka farishta in faridabad.

जमाना जिसे दिमागी तौर पर कमजोर मानता है वही इंसान जाम में फंसे लोगों केलिए किसी फरिश्ता से कम नहीं।

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यह शख्स पिछले एक दशक से यहां के एक महत्वपूर्ण चौराहे पर बिना किसी लालच ट्रैफिक संभाल रहा है। इसकी मुस्तैदी के चलते इस अतिव्यस्त चौराहे पर जाम कभी बड़ी समस्या नहीं बनी।

यहां बात की जा रही है 55 वर्षीय सोहराब खान की। वह शहर के गुड़गांव-अलवर मार्ग स्थित अंबेडकर चौक पर पिछले दस वर्षों से ट्रैफिक संभाल रहा है।

फटेहाल में वह दिनभर गाड़ियों को इधर से उधर जाने का इशारा करता रहता है। वह पड़ोसी प्रदेश राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव पहाड़ी का रहना वाला है तथा मांग कर गुजारा करता है।
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चौक के आसपास रहने वाले बताते हैं कि सड़क पर मुस्तैदी के कारण कई वाहनों के दबाव के कारण इसकी जान पर बन आती है। इसके बावजूद उसने चौक पर यातायात नियंत्रण का काम नहीं छोड़ा।
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सिर्फ खाने पीने के लिए ही छोड़ता है घर

traffic ka farishta in faridabad.

जिला ट्रैफिक कंट्रोल इंचार्ज सब इंपेक्टर अयूब खान भी सोहराब के इस काम के कायल हैं। उन्हाेंने माना कि वह पिछले कई सालों से लगातार ट्रैफिक कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

यहां कहने को पुलिस कर्मी तैनात हैं। लेकिन अधिकतर समय वे डयूटी से गायब रहते है पर सोहना केवल रात में सोने और खाने-पीने के लिए जाने तक ही चौराहे को छोड़ता है। अन्यथा सर्दी की कंपन हो बारिश की धार या फिर तेज धूप वह अपनी जगह से नहीं हिलता।

कितना महत्वपूर्ण है यह चौराहा
गुडगांव-अलवर व भरतपुर-तिजारा जैसे मुय मार्ग को जोडने वाला यह मुख्य चौराहा है।
सदर थाना, सिटी चौकी के अलावा लघुसचिवालय तक पहुंचने का यह मुख्य मार्ग है।
मुख्य बाजार व शहर की ओर जाने वाला मुख्य रास्ता यहां से जाता है।
शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद तक जाने का यह मुख्य रास्ता।

क्या कहतें हैं लोग
क्षेत्रीय समाजिक कार्यकर्ता नाजिम आजाद का कहना है कि सोहराब को वह पिछले करीब दस वर्षो से गुडगांव-अलवर मार्ग पर देख रहें हैं। सोहराब अकसर लगने वाले जाम से लोगों का निजात दिलाता है।

ग्रामीण ताहिर हुसैन कहते हैं कि सोहराब को दिमागी रूप से कमजोर माना जाता है, पर ट्रैफिक कंट्राल करते देखकर इसका एहसास तक नहीं होता।

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