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Toxic Link: मिट्टी में सीसे का उच्चतम स्तर सेहत के लिए खतरनाक, दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के अध्ययन में खुलासा
Thu, 09 Apr 2026 03:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 09 Apr 2026 03:28 AM IST
सार
पर्यावरण अनुसंधान और वकालत संगठन टॉक्सिक्स लिंक का बैटरी रीसाइक्लिंग से लेड की गंदगी नाम का यह अध्ययन बुधवार को जारी किया गया। इसके मुताबिक, यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के पास मिट्टी में सीसे (लेड) का खतरनाक स्तर पाया गया है। पर्यावरण अनुसंधान और वकालत संगठन टॉक्सिक्स लिंक का बैटरी रीसाइक्लिंग से लेड की गंदगी नाम का यह अध्ययन बुधवार को जारी किया गया। इसके मुताबिक, यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।
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अध्ययन में कुछ चुने गए शहरों में लेड-एसिड बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के पास के मिट्टी के 23 नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही रिहायशी इलाकों, स्थानीय समुदायों और प्राइमरी स्कूलों के पास की मिट्टी के भी नमूने इकट्ठा किए गए। विश्लेषण में कहा गया इन सभी नमूनों में 100 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) से 43,800 पीपीएम तक बड़े पैमाने पर लेड प्रदूषण के सबूत मिले, जो बेहद चिंताजनक है।
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पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 के मुताबिक, विश्लेषण में इकट्ठा की गई मिट्टी के नमूनों में से 52 फीसदी (23 में से 12 नमूने) में खतरनाक दूषित स्थल के लिए सीसे के स्तर 5,000 पीपीएम बेंचमार्क से अधिक था। यहीं नहीं, 31 फीसदी नमूनों में सीसा औद्योगिक इलाके के लिए तय सीमा से भी अधिक था। चौंकाने वाली बात यह रही कि अनधिकृत इकाइयों से इकट्ठा किए गए नमूनों के मुकाबले में अधिकृत रीसाइक्लिंग इकाइयों (औपचारिक इकाइयों) से इकट्ठा किए गए मिट्टी के नमूनों में अप्रत्याशित रूप से औसतन सीसे का स्तर ज्यादा पाया गया। एजेंसी
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खराब प्रबंधन से हवा, पानी और मिट्टी हो रही दूषित
लेड-एसिड बैटरी का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, बैकअप पावर सिस्टम जैसे इनवर्टर, अनइंटरप्टिबल पावर सप्लाई (यूपीएस), टेलीकम्युनिकेशन और रेल नेटवर्क में किया जाता है। रीसाइक्लिंग इकाइयों में यही बैटरियां खराब प्रबंधन, खासकर अनधिकृत इकाइयों में सीसे को हवा, पानी और मिट्टी में फैला देता है।
दुनिया में सीसे के संपर्क में आने से हर साल 5.4 लाख मौतें...
सीसा बेहद जहरीली धातु है। यह इंसानी सेहत और पर्यावरण पर बहुत बुरा असर डालता है। स्वास्थ्य मेट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान (आईएचएमई) के 2016 में किए अध्ययन के मुताबिक, सीसे के संपर्क में आने से हर साल 5.4 लाख मौतें होती हैं। इसके सबसे अधिक शिकार भारत जैसे अधिक बोझ वाले निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ता है।