भाजपा विधायक ओपी शर्मा की याचिका पर हाईकोर्ट आज सुनाएगी फैसला
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भाजपा विधायक ओपी शर्मा द्वारा दिल्ली विधानसभा के दो सत्र के लिए निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका विचारयोग्य है या नहीं, इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में अदालत आज फैसला देगी।
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने ओपी शर्मा की और से पेश अधिवक्ता अमन लेखी व दिल्ली विधानसभा सचिवालय की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सधीर नंदराजयोग के तर्क सुनने के बाद कहा कि वे अपना फैसला शनिवार को देंगे।
यदि याचिका विचारयोग्य मानी गई तो नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। शुक्रवार को शर्मा के अधिवक्ता अमन लेखी ने तर्क रखा कि शर्मा का निलंबन गैरकानूनी है। आचरण समिति ने शर्मा के लिए दोषी शब्द का इस्तेमाल किया है जो सरासर गलत है। इस मामले में नियमों की अनदेखी कर उन्हें निलंबित किया गया। ऐसे में इस फैसले को रद्द किया जाए।
दिल्ली विधानसभा सचिवालय व स्पीकर की ओर से पेश अधिवक्ता सुधीर नंदराजयोग ने कहा कि याची ने अदालत को तथ्यों की गलत जानकारी दी है। पहली बार शर्मा को केवल पांच मिनट के लिए विधानसभा से बाहर निकाला गया था।
अदालत ने सत्र में भाग लेने पर लगा रखी है रोक
इससे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे सम्मानजनक शब्दों में शांत रहने को कहा। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया था। इतना ही नहीं शर्मा ने इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के लिए सदन के बाहर मीडिया के समक्ष व सदन के अंदर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। इसके बाद उन्हें निलंबित किया गया।
अदालत द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के अपने अधिकार होते हैं, उन्हें नोटिस नहीं किया जा सकता है। इतना ही नहीं उन्होंने ओपी के बाद अब विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता के रवैये की भी अदालत को जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के नेता व विधायक विजेंद्र गुप्ता बेंच पर चढ़ गए। अमन लेखी ने उनके इस तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है।
ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया जा सकता है। इससे पूर्व शर्मा व आप विधायक लांबा के बीच समझौता नहीं होने पर अदालत ने शर्मा को वर्तमान में चल रही दो दिवसीय सत्र में भाग लेने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था।