मोदी के खिलाफ क्यों लड़ रहे हैं केजरी?
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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल बेशक बनारस में पहली चुनावी रैली करने जा रहे हैं, लेकिन केजरीवाल यहां अपने लिए वोट नहीं मांगेंगे। इसकी जगह उनका ज्यादा जोर भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को हराने की वकालत करने पर होगा।
पार्टी सूत्रों की मानें तो मंगलवार की रैली सियासी तौर पर बेहद अहम है। इसकेलिए चार पेज की एक चिट्ठी तैयार की गई है। इसमें आंकड़ों के सहारे गुजरात के विकास मॉडल के सच का उजागर किया गया है।
पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि बनारस की सियासी लड़ाई बराबरी की नहीं है। एक तरफ मजबूत कैडर वाली पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं। इनके विकास मॉडल की चर्चा सालों से चल रही है। भाजपा ने इनके लिए जबरदस्त अभियान भी चला रखा है।
गुजरात मॉडल पर हमला करेंगे अरविंद केजरीवाल
दूसरी तरफ नई पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, जिनके बनारस से चुनाव लड़ने का फैसला औपचारिक फैसला मंगलवार को होना है। इसके साथ ही पूर्वांचल की सियासत पर असर जाति-धर्म-क्षेत्र का भी रहता है।
इस माहौल में पहली रैली में अपने भाषण से लोगों को लामबंद कर पाना आसान नहीं होगा। पार्टी सूत्रों की मानें तो इससे रणनीति बनाई गई है कि वोट केजरीवाल मांगने की जगह नरेंद्र मोदी का हराने की अपील करें।
इस दौरान सवालों-सवालों में केजरीवाल मोदी के विकास मॉडल व गुजरात दंगों पर मोदी की भूमिका को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेंगे।
बनारस की गंगा-जमुनी तहजीब का देंगे वास्ता
पार्टी के एक वरिष्ठ वरिष्ठ नेता के मुताबिक, बनारस लघु उद्योगों के लिए मशहूर है। जबकि मोदी के शासन में गुजरात में करीब साठ हजार लघु उद्योग बंद हो गए हैं। इसके अलावा जिस तरह से किसानों की जमीनें छीनी गई हैं।
फिर मोदी के जीतने से बनारस की गंगा-जामुनी तहजीब पर भी खतरा होगा। हमारी कोशिश गुजरात के विकास मॉडल की हकीकत बनारस की आवाम के सामने रखने की होगी। अब फैसला वहां के मतदाताओं के हाथ में है कि किस निशान की बटन दबाकर उसे अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं। उन्होंने बताया कि चार पेज की चिटट्ठी रैली के अलावा बनारस के लोगों के बीच बांटी जाएगी।