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'पति या पत्नी में से किसी का भी गलत आचरण दूसरे को अलग रहने के लिए कर सकता है बाध्य '

Mon, 09 Jan 2017 12:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jan 2017 12:44 PM IST
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To conduct separate living spouse can force
उच्च न्यायालय - फोटो : Google

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति या पत्नी दोनों में से कोई एक केवल इस आधार पर अलग होने का फैसला नहीं कर सकता कि ससुराल पहले किसने छोड़ा। अदालत ने कहा विवाहित जोड़े में से एक का आचरण दूसरे को अलग रहने के लिए बाध्य कर सकता है।

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न्यायमूर्ति प्रदीप नंद्राजोग और न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की खंडपीठ ने कहा कि अलग होना एक जगह से वापसी ही नहीं है। बल्कि यह विवाह के सभी कर्तव्यों का त्याग और पति या पत्नी में से किसी एक द्वारा बिना किसी उचित कारण या दूसरे की सहमति के बिना उसे छोड़ देना है।
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खंडपीठ ने एक मामले में यह व्यवस्था देेते हुए परिवार अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें पत्नी द्वारा अलग होने के आधार पर पति के हक में तलाक का निर्णय दिया था। पत्नी ने इस मामले में तलाक के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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खंडपीठ ने कहा रिकॉर्ड से पता चलता है कि पति ने अपीलकर्ता पत्नी को छोड़ा था जो कि आज तक अपने गुजारा भत्ते के लिए लड़ रही है। खंडपीठ ने कहा रिकॉर्ड में यह भी स्पष्ट है कि पत्नी के पास अलग रहने के लिए पर्याप्त आधार थे।

पत‌ि पत्नी क‌िसी एक का भी अलग रहना तलाक का आधार नहीं हो सकता

To conduct separate living spouse can force

खंडपीठ ने कहा हमारी राय है कि द्वारका स्थित परिवार अदालत के न्यायाधीश ने साक्ष्यों को सही तरीके से नहीं समझा। हालांकि अपीलकर्ता पत्नी ससुराल छोड़ कर गई थी लेकिन उसने यह कभी नहीं चाहा कि उसके वैवाहिक रिश्ते हमेशा के लिए खत्म हो जाएं।

खंडपीठ ने कहा कि परिवार अदालत का फैसला इस तथ्य पर आधारित है कि पत्नी ने छह सितंबर 2003 को पति की सहमति के बिना ससुराल छोड़ा था और पति ने इसे क्रूरता का आधार और उसके पत्नी द्वारा किया गया परित्याग बना दिया।

अदालत ने कहा पत्नी ने गवाही में साफ कहा कि उसने पहले 25 जनवरी 2002 को और फिर छह सितंबर 2003 को पति के आचरण की वजह से ससुराल छोड़ा और दोनों ही बार वह गर्भवती थी।

अदालत ने कहा पति ने जिरह के दौरान माना था कि उसने अपनी पत्नी पर अपने पुत्र को मार डालने का आरोप लगाया था। यह आचरण क्रूरता है। इस जोड़े के पुत्र की जन्म के कुछ ही घंटे बाद मौत हो गई थी।

अदालत ने कहा छह सितंबर 2003 को पत्नी के अभिभावकों द्वारा उसे अपने साथ ले जाने तक पति का घर से बाहर रहना और दो दिन बाद झूठे आधार पर तलाक के लिए आवेदन कर देने के रवैये से साफ जाहिर होता है कि वह पत्नी को कितना सम्मान देता था और उसके साथ कैसा व्यवहार करता था।

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