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आजादी से इमरजेंसी तक कांग्रेस का गढ़ रहा बुलंदशहर

Fri, 07 Mar 2014 10:14 PM IST
अमर उजाला, बुलंदश्ाहर
अमर उजाला, बुलंदश्ाहर Updated Fri, 07 Mar 2014 10:14 PM IST
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till emergeny congress lead on bulandshahar seat
बुलंदशहर लोकसभा सीट आजादी से लेकर इमरजेंसी तक कांग्रेस का गढ़ रही है। 1984 के बाद पार्टी जीत ऐसी रूठी कि आज तक नहीं मिली।
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उसके बाद के कई चुनाव में पार्टी का जनाधार लगातार घटता चला गया और पार्टी प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त हो गई।

1952 में पहला आम चुनाव हुआ। उसमें कांग्रेस के रघुबर दयाल मिश्र के सामने किसी भी दल का प्रत्याशी नहीं टिका। मिश्र ने तब पहले ही चुनाव में कांग्रेस का परचम लहराया और संसद में दाखिल हुए। उसके बाद लगातार 1957, 1962, 1967, 1971 में कांग्रेस जीती।

1957 में रघुबर दयाल मिश्र दोबारा जीते। 1962, 1967, 1971 सुरेंद्र प्रताप सिंह ने सीट कांग्रेस की झोली में डाली। 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में भारतीय राष्ट्रीय लोकदल के महमूद हसन खान ने सीट छीन ली।
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उसके बाद 1971 और 1983 में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। लेकिन 1984 में सुरेंद्र पाल सिंह ने कांग्रेस को यह सीट फिर दिला दी। 1984 के बाद कांग्रेस को यहां जीत नसीब नहीं हुई।
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वह लगातार चुनाव मैदान में दम भरती है। इस बार 2014 के चुनाव में भी पूरी तैयारी में हैं।
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