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315 सीसीटीवी , 800 पुलिसवालों को दो कैदियों ने दिया धोखा

Tue, 30 Jun 2015 01:57 PM IST
Updated Tue, 30 Jun 2015 01:57 PM IST
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Tihar expenses on jail security failed again

तिहाड़ की तीन स्तरीय सुरक्षा को विचाराधीन कैदियों ने तार-तार कर दिया। तिहाड़ की बाहरी सुरक्षा पर तमिलनाडु स्पेशल पुलिस (टीएसपी) के जवान तैनात हैं। तिहाड़-प्रशासन टीएसपी के करीब 800 जवानों पर सालाना करीब 60 करोड़ रुपये खर्च करती है।

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इसके अलावा तिहाड़ की सुरक्षा में आईटीबीपी, सीआरपीएफ और तिहाड़ की आंतरिक सुरक्षा जेल पुलिस कर्मियों के हवाले है। सूत्रों का कहना है कि तिहाड़ की बाहरी सुरक्षा और जेल में कैदियों की जांच-पड़ताल का जिम्मा टीएसपी के हवाले है।
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तिहाड़ के चारों ओर सुरक्षा के लिए टावर लगाए गए हैं जिन पर टीएसपी के जवान तैनात रहते हैं। सूत्रों की मानें तो जिस जगह पर सेंधमारी की गई है, वह जगह टावर संख्या 68, 69 व 70 से दिखाई देती है। लिहाजा जांच के बाद रिपोर्ट आने पर इन कर्मियों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
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तिहाड़ जेल मामले में नए गृहमंत्री को कठघरे में नहीं खड़ा करना चाहिए। उन्होंने तो कुछ दिन पहले ही उस मंत्री से चार्ज लिया है जो धोखाधड़ी के मामले में खुद तिहाड़ जेल में हैं। तिहाड़ जेल से कैदी के फरार होने के लिए जिम्मेदार कौन है? दो गृह सचिव और कमजोर गृह मंत्री, जिन्होंने फर्जी डिग्री धारक से चार्ज लिया है।
-अजय माकन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
पवन कुमार

315 सीसीटीवी कैमरों को दे दी मात

Tihar expenses on jail security failed again

इंडियन तिब्बत बॉर्डर पुलिस के भी करीब 200 जवान तैनात हैं। इसके अलावा तिहाड़ के सभी द्वार पर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया है।

तीन स्तरीय सुरक्षा के बाद भी कैदियों पर निगरानी रखने के लिए तिहाड़ में 315 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन इन कैमरों की नजर भी विचाराधीन कैदियों जावेद और फैजान पर नहीं पड़ी।

आश्चर्य की बात है कि जेल संख्या सात से दीवार फांदने से लेकर जेल संख्या आठ होते हुए बाहरी दीवार तक पहुंचने के क्रम में एक भी जगह कैदी सीसीटीवी की जद में नहीं आए। अब तिहाड़ में हर जगह सीसीटीवी लगाने की तैयारी की जा रही है।

जेल की दीवार में लगी है ‘घुन’

Tihar expenses on jail security failed again

तिहाड़ जेल के डीआईजी मुकेश प्रसाद का कहना है कि जेल की दीवार में सेंधमारी करने के लिए किसी औजार का इस्तेमाल नहीं किया गया है। उनका कहना है कि उस जगह की दीवार इतनी कमजोर थी कि ईंट और पत्थर से मारकर तोड़ दिया गया है।

जिस जगह पर दीवार में सेंधमारी की गई है, उस जगह पर न तो दीवार में कोई पत्थर निकला है और न ही कोई बड़ी ईंट। ऐसा लगता है सीमेंट के नाम पर भी खानापूर्ति की गई है। बिल्कुल खराब मसाले का इस्तेमाल किया गया था। दीवार से निकले मैटेरियल को सुरक्षित रखा गया है और उसे जांच के लिए भेजा जाएगा।

पूर्व में हुईं घटनाएं
•1976 में जेल संख्या दो में करीब 100 फुट लंबी सुरंग बनाकर करीब एक दर्जन कैदी फरार हो गए थे।
•16 मार्च 1986 को चार्ल्स शोभराज ने मिठाई में नशीला पदार्थ मिलाकर जेलकर्मियों को खिलाया और कर्मी अचेत हो गए थे और वह जेल से भाग निकला।
•17 फरवरी-2004 को पूर्व सांसद व दस्यु सुंदरी फूलन देवी का हत्यारा शेर सिंह राणा फर्जी पुलिसकर्मियों की मदद से भागने में सफल रहा था।

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