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Delhi Crime: बैंक कर्मी की मिलीभगत से लगाते थे खाते में सेंध, आरोपी पूर्व स्वीकृत लोन वाले खाताधारकों सेे कर रहे थे धोखाधड़ी

Thu, 23 Jun 2022 05:59 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 23 Jun 2022 05:59 AM IST
सार

उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है।जो खाताधारक का प्री-एप्रूव (पूर्व स्वीकृत) लोन निकलवा कर अपने खातों में ट्रांसफर करवाते थे। बैंक कर्मी भी आरोपियों की मदद करता था। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। 

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Three people were cheating in Delhi with pre-approved loan account holders
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने खाताधारक का प्री-एप्रूव (पूर्व स्वीकृत) लोन निकलवा कर अपने खातों में ट्रांसफर करवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने निजी बैंक के क्रेडिट कार्ड डिवीजन के कर्मचारी समेत तीन को गिरफ्तार किया है। तीनों की पहचान बैंक कर्मी सन्नी कुमार सिंह (27), कपिल (28) और पाविन रमेश (21) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, 12 सिमकार्ड, 8 डेबिट काड, दो फर्जी आधार और तीन बैंक अकाउंट का पता किया है। गिरोह अब तक सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुका है। आरोपी का साथी फरार है।

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पुलिस के मुताबिक सन्नी आरोपियों को खाताधारकों की जानकारी उपलब्ध कराता था। आरोपी खाताधारक की सिमकार्ड को दोबारा से जारी करा लेते थे। खाते से जुड़े ईमेल आईडी को बदलवाकर अकाउंट के आधार पर लोन लेकर उसे अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते थे। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से ठगी की शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता अजीश का एचडीएफसी बैंक में खाता है। पिछले दिनों उनके मोबाइल का सिमकार्ड अचानक बंद हो गया। इसके बाद उनके ईमेल पर पासवर्ड बदलने का मैसेज आया। 
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संदिग्ध लगने पर वह वोडाफोन स्टोर गए तो पता चला कि किसी ने फर्जी कागजात लेकर उनकी सिम दोबारा से इश्यू करवा ली है। शक होने पर उन्होंने अपने खाते की जांच की पता चला कि किसी ने उनके नाम से बैंक से 11 लाख रुपये का लोन लेकर उसमें से एक लाख को किसी दूसरे खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर भी करा लिया गया था।  अजीश ने मामले की सूचना बैंक और पुलिस को दी। छानबीन के बाद उत्तरी जिला साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की।
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ऐसे करते थे ठगी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सन्नी निजी बैंक के क्रेडिट कार्ड डिवीजन में काम करता है। उसकी पहुंच बैंक के खाताधारकों की पर्सनल जानकारी तक है। जिन खाता धारकों के अकाउंट पर प्री-एप्रूव लोन होता था। यह उसकी जानकारी आरोपियों को देता था। अन्य आरोपी फोटोशॉप की मदद से खाताधारकों के फर्जी आईडी जैसे आधार व दूसरे कागजात तैयार कराते थे। इसके बाद खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की इन कागजात के आधार पर सिमकार्ड जारी कराई जाती थी।

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