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दिल्ली के 300 नामी स्कूलों को नहीं खसरे के टीके पर भरोसा, टीकाकरण के लिए सरकार से किया किनारा
Thu, 10 Jan 2019 11:58 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Thu, 10 Jan 2019 11:58 PM IST
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टीकाकरण (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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सोशल मीडिया पर वायरल एक अफवाह की वजह सेसरकार को खसरा और रूबेला के टीकाकरण को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी का परिणाम है कि दिल्ली के 300 नामी स्कूलों ने इस अभियान पर भरोसा नहीं जताया है। इन स्कूलों का मानना है कि उनके यहां पढ़ने वाले बच्चों को इस टीके की जरूरत नहीं है। जबकि दिल्ली में खसरे की वजह से हर साल सैकड़ों बच्चे बीमार पड़ते हैं। 16 जनवरी से दिल्ली में 15 साल तक के बच्चों के लिए शुरू होने जा रहे टीकाकरण को 9700 स्कूलों में चलाया जाना है, लेकिन अफवाहों के चलते सरकारी महकमे की परेशानी भी बढ़ी है।
यूनिसेफ के एक कार्यक्रम में गुरुवार को दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. नीतून मुंडेजा बताती हैं कि 300 नामी स्कूलों ने सहभागिता से इंकार किया है। फिलहाल इन स्कूलों में प्राइवेट डॉक्टर व जिला स्तरीय टीम को भेजा जा रहा है। ताकि वहां के बच्चों को भी इन बीमारियों से बचाव मिल सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली के हर छोटे-बड़े इलाके को शामिल किया है। 2 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में दिल्ली के पॉश इलाकों को फरवरी में लक्ष्य पर लिया जाएगा।
इन इलाकों के आसपास बड़े अस्पतालों में टीका लगाया जाएगा। वहीं राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुरेश सेठ ने बताया कि 1.9 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में 15 वर्ष तक के बच्चों की संख्या करीब 58.31 लाख है। इनमें से 9 माह से 15 साल के मध्य बच्चों की संख्या 55.37 लाख है। 27 लाख बच्चे सरकारी तो 17 लाख बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। इन सभी को टीकाकरण में शामिल करने के लिए 1500 कर्मचारियों की टीमें बनाई हैं। प्रत्येक टीम में तीन कर्मचारी और एक सुपरवाइजर रहेगा।
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क्या है अफवाह
सोशल मीडिया पर चल रही अफवाह के मुताबिक बच्चों को ये टीका लगाया गया तो 40 वर्ष की आयु में पहुंचने तक बच्चा पैदा करने की क्षमता प्रभावित होगी। ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का षड्यंत्र है ताकि देश के एक समुदाय पर अत्याचार हो सके। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की भ्रांतियां गलत हैं। मिजल्स (खसरा) और रूबेला का टीका एकदम सुरक्षित है। बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए ये टीका जरूरी है। उधर दिल्ली सरकार ने राजधानी के 400 मदरसों में ये अभियान चलाने का निर्णय लिया है। मेट्रो स्टेशन, स्कूल, अस्पताल और मदरसों में ये निशुल्क टीकाकरण किया जाएगा।
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यूनिसेफ के एक कार्यक्रम में गुरुवार को दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. नीतून मुंडेजा बताती हैं कि 300 नामी स्कूलों ने सहभागिता से इंकार किया है। फिलहाल इन स्कूलों में प्राइवेट डॉक्टर व जिला स्तरीय टीम को भेजा जा रहा है। ताकि वहां के बच्चों को भी इन बीमारियों से बचाव मिल सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली के हर छोटे-बड़े इलाके को शामिल किया है। 2 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में दिल्ली के पॉश इलाकों को फरवरी में लक्ष्य पर लिया जाएगा।
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इन इलाकों के आसपास बड़े अस्पतालों में टीका लगाया जाएगा। वहीं राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुरेश सेठ ने बताया कि 1.9 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में 15 वर्ष तक के बच्चों की संख्या करीब 58.31 लाख है। इनमें से 9 माह से 15 साल के मध्य बच्चों की संख्या 55.37 लाख है। 27 लाख बच्चे सरकारी तो 17 लाख बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। इन सभी को टीकाकरण में शामिल करने के लिए 1500 कर्मचारियों की टीमें बनाई हैं। प्रत्येक टीम में तीन कर्मचारी और एक सुपरवाइजर रहेगा।
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क्या है अफवाह
सोशल मीडिया पर चल रही अफवाह के मुताबिक बच्चों को ये टीका लगाया गया तो 40 वर्ष की आयु में पहुंचने तक बच्चा पैदा करने की क्षमता प्रभावित होगी। ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का षड्यंत्र है ताकि देश के एक समुदाय पर अत्याचार हो सके। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की भ्रांतियां गलत हैं। मिजल्स (खसरा) और रूबेला का टीका एकदम सुरक्षित है। बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए ये टीका जरूरी है। उधर दिल्ली सरकार ने राजधानी के 400 मदरसों में ये अभियान चलाने का निर्णय लिया है। मेट्रो स्टेशन, स्कूल, अस्पताल और मदरसों में ये निशुल्क टीकाकरण किया जाएगा।