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जीएसटी से 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित, कारोबार पड़ा ठंडा

Tue, 04 Jul 2017 10:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Tue, 04 Jul 2017 10:04 AM IST
सार

-एमएसएमई तबके के उद्योग सबसे अधिक हो रहे हैं प्रभावित 
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-एमएसएमई तबके के उद्योग सबसे अधिक हो रहे हैं प्रभावित
-बड़े उद्योगों को छोटे यूनिट से नहीं मिल रहा है वर्क ऑर्डर
-अस्थायी तौर पर मांग हुई बंद, कारोबार पड़ा ठंडा
-गुरुग्राम में विभिन्न उद्योगों के करीब 1000 हैं छोटे बड़े यूनिट
शाहनवाज आलम
गुरुग्राम।

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three hundred crore business effected due to gst in gurugram

विस्तार

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद कर व्यवस्था और देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की बात की जा रही है, लेकिन फौरी तौर पर उद्योग जगत में संकट छा गया है। जीएसटी के लागू होने के पूर्व से लागू होने के बाद तक गुरुग्राम में करीब 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।

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सबसे अधिक प्रभाव एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम) तबके के उद्योगों पर पड़ा है। इनमें टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग संबंधी काम ठप पड़ा हुआ है। अस्थायी तौर पर मांग बंद होने से कारोबार ठंडा पड़ गया है। 
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दरअसल, गुरुग्राम में ऑटोमोबाइल कंपोनेंट से लेकर गारमेंट, टैक्सटाइल समेत कई 100 से अधिक उद्योग है। करीब 400 बड़े उद्योगों की यूनिट है। इनके साथ जुड़े 600 से अधिक यूनिटें है। जो अधिकांश वर्क ऑर्डर पर काम करती है। इनमें अधिकांश मध्यम और लघु उद्योग है।
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जीएसटी लागू होने से पहले ही अधिकांश वर्क ऑर्डर देने वाली कंपनियों ने ऑर्डर देना बंद कर दिया था। इसकी मुख्य वजह ट्रेडर्स के पास से ऑर्डर नहीं आ रहे थे। जिन ट्रेडर्स के पास स्टॉक था, वह जीएसटी के भय से छूट देकर निकाले जा रहे थे।

बीते 15 दिनों से पूरी से चेन कारोबार प्रभावित है। अकेले गुरुग्राम में करीब 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। बता दें कि पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के अनुमान के मुताबिक यहां हर दिन करीब 100 करोड़ का एमएसएमई कारोबार होता है।

टेक्सटाइल में कारोबार में हुई है अधिक गिरावट

three hundred crore business effected due to gst in gurugram

कर दरों में बदलाव के मद्देनजर छोटे उद्यमियों ने काम लगभग बंद कर दिया है। कारोबार में करीब 25-40 फीसदी तक गिरावट आ गई है। करोड़ों रुपये का ऑर्डर मार्केट में अटक गया है। ट्रेडर्स ने खरीद-फरोख्त कम कर दिए हैं। पहली बार जीएसटी में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को कर के दायरे में लाया गया है।

अभी तक इन्हें छूट थी। इसकी वजह से इंडस्ट्री से जुड़े लोग सहमे हुए है। नया माल खरीदना बंद कर दिया है। थोक विक्रेताओं ने निर्माताओं से माल खरीदना बंद कर दिया है। छोटे उद्यमियों की तरफ से उत्पादन बंद होने से इनके लिए जॉब वर्क करने वाले कारोबारियों का धंधा भी मंदा हो गया है। 

मोहित जैन, चेयरमैन एमएसएमई कमेटी, पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री: एमएसएमई बुरी तरह प्रभावित है। जॉब वर्क के ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। एमएसएमई से जुड़े उद्योग जीएसटी को समझने में जुटे हुए हैं। वर्क ऑर्डर नहीं मिलने से कई लोगों का रोजगार भी खतरे में हैं।

विकास जैन, अध्यक्ष, गुडग़ांव चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री: उद्योग जगत इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं था। जीएसटी लागू होने से पहले से मैन्युफैक्चरिंग प्रभावित है। अभी दो सप्ताह और प्रभावित रहने संभावना है। ऐसे में उद्योगों को बहुत नुकसान हो रहा है। सरकार को इस बारे में सोचाना चाहिए।

अरुण जैन, अध्यक्ष, टेक्सटाइल मैन्युफैक्चर एसोसिएशन: बड़ी इंडस्ट्री को अभी अधिक फर्क नहीं पड़ा है। छोटे उद्यमी इससे प्रभावित हो रहे हैं। ट्रेडर्स ने माल उठाना बंद कर रखा है। इस इंडस्ट्री के लिए अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। तस्वीर साफ होने के बाद स्थिति का सही अंदाजा लगाया जा सकता है।

अमित जिंदल, महासचिव, गुरुग्राम ज्वेलरी एसोसिएशन: जीएसटी से पहले काम था, लोग खरीददारी कर रहे थे। एक जुलाई के बाद अचानक मंदी आ गई है। तीन दिनों से किसी भी ज्वेलर के पास काम नहीं है। जीएसटी के बाद अब ग्राहक के लिए सोना, चांदी व डायमंड की ज्वैलरी को खरीदना और बेचना महंगा हो गया है। इसका प्रभाव दिखने लगा है।

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