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दिल्ली प्रदूषण: इस वर्ष ज्यादा जलाई गई पराली, ईपीसीए चेयरमैन ने कहा- खाद के तौर पर हो इस्तेमाल

Fri, 16 Nov 2018 09:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Nov 2018 09:48 PM IST
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This year more prali burns says epca chairman
parali - फोटो : फाइल फोटो

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के चेयरमैन भूरेलाल ने एक कार्यशाला के दौरान कहा कि सख्त प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में बीते वर्ष के मुकाबले इस बार ज्यादा पराली जलाई गई है। वहीं, खेतों में धान कटाई के बाद बचे अवशेष को जलाने के बजाए यदि जुताई के साथ खेतों में ही मिला दिया जाए तो वह बेहतर खाद का भी काम कर सकती है। 

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पीएचडी चैंबर की ओर से स्थिर पर्यावरण और आर्थिक लाभ के लिए फसल अवशेष की उपयोगिता पर एक कार्यशाला आयोजित की गई थी। इस दौरान ईपीसीए चेयरमैन भूरेलाल ने कहा कि जरूरत है कि लोगों की मानसिकता बदली जाए। फसल अवशेष का इस्तेमाल यदि खाद या अन्य वैकल्पिक कार्यों के लिए किया जाएगा तो दिल्ली और आस-पास प्रदूषण की समस्या कम हो सकती है। 
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चेयरमैन भूरेलाल ने कहा कि करीब 45 दिनों में फसल अवशेष पूरी तरह खत्म हो जाती है। जबकि किसानों के पास एक फसल से दूसरी फसल पर जाने के लिए महज 25 दिन होते हैं। यदि हम 45 दिनों में गलने वाले फसल अवशेष के दिनों को को घटाकर 25 दिन कर पाएं तो इस समस्या का समाधान काफी हद तक हल हो सकती है। 
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उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी इस समस्या के समाधान को लेकर विकल्प पर विचार करने के लिए तैयार है। जबकि पुरानी पीढ़ी पराली को जलाए जाने पर ही टिकी है। सब्सिडी देना फसल अवशेष के लिए एक रास्ता है लेकिन हमें पूरी कोशिश फसल अवशेष न जलाए जाने को लेकर होनी चाहिए अन्यथा सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। दिल्ली में पराली का प्रदूषण उत्प्रेरक का काम करता है जबकि दिल्ली का अपना भी वाहनों का प्रदूषण काफी है। 

दिल्ली की खराब हवा के लिए पंजाब और हरियाणा में पराली का जलाया जाना एक प्रमुख कारण है। वहीं, दिवाली के दिन पटाखों और पराली के धुएं के कारण दिल्ली की हवा में पर्टिकुलेट मैटर 600 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के आंकड़े को पार कर गया था। 


कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त कमिश्नर ने कहा कि बीते वर्ष 2 करोड़ टन पराली में कुल 1.7 करोड़ टन पराली जलाई गई थी जबकि इस वर्ष अभी तक करीब 1.5 करोड़ टन पराली जलाई जा चुकी है। 

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