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ये भी है BJP की हार की सबसे बड़ी वजह

Wed, 11 Feb 2015 12:42 PM IST
Updated Wed, 11 Feb 2015 12:42 PM IST
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This is one of the biggest reason soundly defeated BJP

आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक और प्रचंड बहुमत कैसे मिला यह अन्य राजनैतिक दलों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसा अमूमन कम होता है कि यह परिणाम आने के बाद राजनैतिक पंडितों को यह कैलकुलेशन करने की भी जरूरत नहीं रहती कि किस जाति, वर्ग या क्षेत्र ने किसे वोट दिए। वहीं अब भाजपा के लिए भी ग्रामीण व अपने गढ़ वाली करीब ढाई दर्जन सीटें हाथ से जाने पर अलार्मिंग पोजीशन है।

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मोदी फीवर का असर कम होने पर आने वाले समय में बिहार, उत्तर प्रदेश व पंजाब के विधानसभा चुनावों को लेकर विपक्षी दल उत्साहित नजर आ रहे हैं। जाहिर है कि थर्ड फ्रंट अब नए जोश खरोश के साथ जुटेगा।
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हरियाणा में भाजपा को पहली बार बहुमत मिलने के बाद यह माना जा रहा था कि मोदी लहर में ग्रामीण व किसान वोटर उनसे जुड़ा है लेकिन अब दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में इन वोटरों के छिटकने पर लग रहा है कि कहीं न कहीं ग्रामीण वोटर भूमि अधिग्रहण बिल व अन्य मामलों में मोदी सरकार से नाराज हैं।
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बीजेपी का ये दांव भी उसे जिता नहीं पाया

This is one of the biggest reason soundly defeated BJP

हरियाणा के मुख्यमंत्री को दिल्ली के प्रचार में लगाना भी काम नहीं आया। इस चुनाव में राजधानी की नरेला, बादली, रिठाला, बवाना, मुंडका, किराड़ी, नांगलोई, उत्तर नगर, मटियाला, नजफगढ़, बिजवासन, पालम, महरौली, छतरपुर, तुगलकाबाद व बदरपुर आदि सीटों पर आप का परचम फैल गया है।

यह सभी सीटें पिछली बार भाजपा व कांग्रेस के पास थीं। यही नहीं वैश्य व पंजाबी बाहुल्य सीटों में शामिल सदर बाजार, शालीमार बाग, वजीरपुर, सदर बाजार, मोतीनगर, तीमारपुर, राजौरी गार्डन, हरि नगर व त्रिनगर सीटों पर भी भाजपा को झटका खाना पड़ा। यानी देश के लिए यह भी अच्छे संकेत माने जा सकते हैं कि जाति, वर्ग व क्षेत्र का कोई असर इस चुनाव में नहीं दिखा।

लोकसभा के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में मोदी के नाम पर चुनाव लड़ चुकी भाजपा को जबर्दस्त जीत मिली। पार्टी के मुख्य कर्ता धर्ताओं ने दिल्ली में भी मोदी के नाम पर चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। ओबामा की यात्रा व मोदी के समय न दे पाने के बीच आप ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर जनता के बीच सवाल करने शुरू किए तो आनन-फानन में पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को सीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट किया गया।

राजनैतिक अनुभवहीनता व पार्टी में किरण के आने से भितरघात भी भाजपा को काफी भारी पड़ा। इस समय पर भाजपा की हालत ठीक वैसी है जैसे कि हमारा नुकसान हो तो हो लेकिन दूसरे का फायदा नहीं होना चाहिए। मीडिया के बीच मात्र तीन सीटें रह गई इस सवाल पर वह कांग्रेस के शून्य रहने की बात जरूर कहती है।

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