'दिल्ली में जंगलराज जैसे हालात, जो स्वयं को बचा सकेगा वही रहेगा यहां सुरक्षित'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी चिंता जताते हुए कहा कि दिल्ली में जंगलराज के हालात है, जो स्वयं को बचा सकता है वही यहां सुरक्षित रहेगा। राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त भर्ती करने व फॉरेंसिक लैब में लंबित मामलों को गंभीरता से न लेने पर हाईकोर्ट ने एकबार फिर केंद्र व दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लिया है।
अदालत ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पुलिस की भर्ती के लिए केंद्र के पास बजट नहीं है तो वो कोर्ट को बता दें ताकि हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई ही बंद कर दे।
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वो अगली सुनवाई में ये बताए कि कितने पद रिक्त हैं जबकि दिल्ली सरकार से पूछा है कि फॉरेंसिक लैब में पड़े केसों में क्या हुआ है। इस दौरान दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) में 11000 केस लंबित है। अदालत ने कहा कि ऐसे में लंबित मुकदमों का फैसला कैसे जल्द संभव है।
'राजधानी में सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं सरकारें'
सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि दिल्ली पुलिस में भर्ती के लिए वित्त मंत्रालय को फंड देना है। हाईकोर्ट ने कहा कि गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच का मामला है लेकिन केंद्र के रुख से साफ है कि वो गंभीरता नहीं दिखा रही है। लिहाजा केंद्र इस मामले में कोर्ट को प्रस्ताव दे और बताए कि कोर्ट कब तक इंतजार करे।
अदालत ने कहा हम बार-बार आपसे विनम्र आग्रह के साथ राजधानी में सुरक्षा ठीक करने के लिए कह रहे हैं लेकिन आप कुछ नहीं कर रहे। अदालत ने कहा कि आप एक तरफ कह रहे हैं कि पुलिसकर्मियों के रिक्त पद भरे जा रहे हैं तो दूसरी तरफ कह रहे हैं कि फंड नहीं है। कभी 14 हजार रिक्त पद बताए जाते हैं तो कभी आठ हजार।
अदालत ने कहा कि हम आप को लोगों की सुरक्षा के लिए कह सकते हैं, मजबूर नहीं कर सकते। यदि आप को लगता है के कुछ नहीं करना तो बता दें हम सुनवाई बंद कर देंगे या यह बता दें कि कितना इंतजार करे। आगे लोग जानें, जंगल राज में जो स्वयं को बचा सका वो सुरक्षित रहेगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 मई तय की है।
दरअसल 16 दिसंबर गैंगरेप मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सुनवाई शुरू की है। इसमें अतिरिक्त पुलिस बल, महिला सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरे और फॉरेंसिक टेस्ट संबंधी मुद्दे शामिल हैं।