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फरीदाबाद: गाड़ियों के मुकाबले साइलेंसर चुराने पर ज्यादा ध्यान दे रहे चोर, अच्छी खासी मिलती है कीमत
Mon, 18 Jan 2021 11:36 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 18 Jan 2021 11:36 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
शहर के चोरों की निगाह आजकल गाड़ियों से ज्यादा उनके साइलेंसर पर है। चोरों का एक गिरोह वाहनों के साइलेंसर चोरी कर रहा है। इन साइलेंसरो की बाजार में काफी मांग है। कार व मोटरसाइकिल के साइलेंसर में पैलेडियम नाम की धातु के लिए इनकी चोरी होती है। बेहद कम मात्रा में यह साइलेंसर में डाली जाती है। यह वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने का काम करता है। इसकी कीमत सोने से भी अधिक होती है।
ऐसे हुआ सारे षड्यंत्र का खुलासा:
पिछले दिनों ऊंचा गांव और सेक्टर-48 क्राइम ब्रांच ने साइलेंसर चोरी करने वाले चोरों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि आरोपी साइलेंसर चोरी करके नूंह में एक व्यक्ति को देते थे। उन्हें एक साइलेंसर के लिए उन्हें पांच से दस हजार रुपये मिलते थे। जिस व्यक्ति को चोर साइलेंसर बेचते थे, वह अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। चोरों को भी ठीक-ठीक नहीं मालूम की चोरी किए गए साइलेंसर का क्या इस्तेमाल होता है। उन्होंने आधी-अधूरी जानकारी पुलिस को दी। इसमें बताया कि साइलेंसर से निकलने वाली मिट्टी कैंसर, टीबी जैसी बीमारियों की दवा बनाने में काम आती है। एक चोर ने बताया कि साइलेंसर की मिट्टी ( पाउडर )बहुत महंगी बिकती है। पुलिस का कहना है कि जब चोरी के साइलेंसर खरीदने वाला व्यक्ति हत्थे चढ़ेगा, तब सही से पता लग सकेगा कि फिलहाल इसका क्या इस्तेमाल किया जा रहा है।
बोले विशेषज्ञ:
पेशे से मेकेनिकल इंजीनियर प्रमोद ने बताया कि साइलेंसर का काम वाहनों की आवाज कम करने के साथ ही हवा में प्रदूषण की मात्रा कम करना भी होता है। इसमें एक कैटेलिटिक कनवर्टर नाम का पुर्जा होता है। इस पुर्जे में प्लेटिनम, पैलेडियम और रोडियम धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन धातुओं के संपर्क में आकर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस कार्बन डाईऑक्साइड और पानी में बदल जाती है। यह धातु इंजन से निकलने वाली नाइट्रोजन गैस को भी सोख लेती है। यह तीनों धातु बेहद महंगी हैं। इनमें पोलोडियम की कीमत सोने से भी ज्यादा होती है। इन्हीं धातुओं के लिए साइलेंसर चोरी होते हैं।
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लगातार बढ़ रहे हैं साइलेंसर चोरी के मामले
साइलेंसर चोर गिरोह अब तक 20 से अधिक वाहनों के साइलेंसर चोरी कर चुके हैं। ऊंचा गांव और सेक्टर-48 क्राइम ब्रांच ने साइलेंसर चोरी करने वाले चोर पकड़े। कुछ दिनों तक इस तरह की वारदातों पर अंकुश लगा। अब फिर से ऐसी घटनाएं शुरू हो गई हैं। दो दिन पहले एसजीएम नगर थाना क्षेत्र में एक कार का साइलेंसर चोरी हुआ। साइलेंसर चोरी की घटना को वाहन मालिक दर्ज कराना भी कम पसंद करते हैं क्योंकि इसका इंश्योरेंस जल्दी मिल जाता है।
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ऐसे हुआ सारे षड्यंत्र का खुलासा:
पिछले दिनों ऊंचा गांव और सेक्टर-48 क्राइम ब्रांच ने साइलेंसर चोरी करने वाले चोरों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि आरोपी साइलेंसर चोरी करके नूंह में एक व्यक्ति को देते थे। उन्हें एक साइलेंसर के लिए उन्हें पांच से दस हजार रुपये मिलते थे। जिस व्यक्ति को चोर साइलेंसर बेचते थे, वह अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। चोरों को भी ठीक-ठीक नहीं मालूम की चोरी किए गए साइलेंसर का क्या इस्तेमाल होता है। उन्होंने आधी-अधूरी जानकारी पुलिस को दी। इसमें बताया कि साइलेंसर से निकलने वाली मिट्टी कैंसर, टीबी जैसी बीमारियों की दवा बनाने में काम आती है। एक चोर ने बताया कि साइलेंसर की मिट्टी ( पाउडर )बहुत महंगी बिकती है। पुलिस का कहना है कि जब चोरी के साइलेंसर खरीदने वाला व्यक्ति हत्थे चढ़ेगा, तब सही से पता लग सकेगा कि फिलहाल इसका क्या इस्तेमाल किया जा रहा है।
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बोले विशेषज्ञ:
पेशे से मेकेनिकल इंजीनियर प्रमोद ने बताया कि साइलेंसर का काम वाहनों की आवाज कम करने के साथ ही हवा में प्रदूषण की मात्रा कम करना भी होता है। इसमें एक कैटेलिटिक कनवर्टर नाम का पुर्जा होता है। इस पुर्जे में प्लेटिनम, पैलेडियम और रोडियम धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन धातुओं के संपर्क में आकर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस कार्बन डाईऑक्साइड और पानी में बदल जाती है। यह धातु इंजन से निकलने वाली नाइट्रोजन गैस को भी सोख लेती है। यह तीनों धातु बेहद महंगी हैं। इनमें पोलोडियम की कीमत सोने से भी ज्यादा होती है। इन्हीं धातुओं के लिए साइलेंसर चोरी होते हैं।
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लगातार बढ़ रहे हैं साइलेंसर चोरी के मामले
साइलेंसर चोर गिरोह अब तक 20 से अधिक वाहनों के साइलेंसर चोरी कर चुके हैं। ऊंचा गांव और सेक्टर-48 क्राइम ब्रांच ने साइलेंसर चोरी करने वाले चोर पकड़े। कुछ दिनों तक इस तरह की वारदातों पर अंकुश लगा। अब फिर से ऐसी घटनाएं शुरू हो गई हैं। दो दिन पहले एसजीएम नगर थाना क्षेत्र में एक कार का साइलेंसर चोरी हुआ। साइलेंसर चोरी की घटना को वाहन मालिक दर्ज कराना भी कम पसंद करते हैं क्योंकि इसका इंश्योरेंस जल्दी मिल जाता है।