फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Thewa is an example of conservation of art and culture

Delhi: कला और संस्कृति के संरक्षण का उदाहरण है 'थेवा', राष्ट्रीय कला केंद्र में की गई स्क्रीनिंग

Fri, 21 Apr 2023 08:14 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 21 Apr 2023 08:14 PM IST
सार

निर्देंशक शिवानी पांडेय ने फिल्म के निर्मित होने की कहानी को दर्शकों के साथ साझा किया। दर्शकों ने भी निर्देंशक से फिल्म से जुड़े प्रश्न किये। 

विज्ञापन
Thewa is an example of conservation of art and culture
राष्ट्रीय कला केंद्र में की गई 'थेवा' की स्क्रीनिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में शुक्रवार को चलचित्र 'थेवा' की स्क्रीनिंग की गई। केंद्र के समवेत सभागार में सायं चार बजे से मीडिया सेंटर द्वारा फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। निर्देंशक शिवानी पांडेय ने फिल्म के निर्मित होने की कहानी को दर्शकों के साथ साझा किया। दर्शकों ने भी निर्देंशक से फिल्म से जुड़े प्रश्न किये।

विज्ञापन

Thewa is an example of conservation of art and culture
कार्यक्रम में मौजूद श्रेतागण - फोटो : अमर उजाला

निर्देंशक शिवानी पांडेय ने बताया कि सोने की महीन चादरों को रंगीन कांच पर जोड़कर छोटे उपकरणों की मदद से सोने पर डिजाइन तैयार करने का नाम 'थेवा' है। जो कि भारत में सदियों से प्रचलित है। इस कला में अब राजस्थान राज्य के प्रतापगढ़ नगर पंचायत के मात्र 12 परिवार लगे हुए हैं। इस हुनर पर आधारित चलचित्र 'थेवा' का प्रदर्शन किया गया। निर्देशिका शिवानी पांडेय द्वारा निर्देंशित चलचित्र 'थेवा' में उन गुमनाम नायकों को दिखाया है जो रहस्यमय तरीके से निर्मित कला को जीवित रखे हुए हैं। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ऐसे ही कला और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए चलचित्र तैयार करता रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

Thewa is an example of conservation of art and culture
कार्यक्रम में मौजूद श्रेतागण - फोटो : अमर उजाला

लेखिका मालविका जोशी ने फिल्म की तारीफ करते हुए कहा कि अनोखी कला के बारे में दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों के कारण ही कला और संस्कृति का संरक्षण किया जा सकता है। सेंसर बोर्ड के पूर्व सदस्य अतुल गंगवार ने कहा कि ऐसे चलचित्र ही हमारी संस्कृति और कला को जीवंत बनाए हुए हैं। इससे अन्य राज्यों की संस्कृति को भी चलचित्र के माध्यमों से जनता के सामने लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। जिससे हमारे देश की विभिन्न राज्यों की कलाओं और संस्कृति की जानकारी अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो सके। फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान किसान नेता नरेश सिरोही, नियंत्रक अनुराग पुनेठा, उप नियंत्रक श्रुति नागपाल, उमेश पाठक आदि मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed