इन 20 सीटों की जीत ही तय करेगी दिल्ली किसकी होगी?
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मीडिया या एजेंसियों के सर्वे में भले ही आप व भाजपा का क्रम पहले व दूसरे नंबर पर रोज अदल-बदल रहा हो, लेकिन हकीकत में कड़े मुकाबले के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी करीब डेढ़ दर्जन सीटों का परिणाम तय करेगा कि दिल्ली की गद्दी पर किसका कब्जा होगा।
इन सीटों पर फंसी हार-जीत के बीच डेरा सच्चा सौदा के भाजपा को समर्थन देने तथा मुस्लिम वोटरों का आप के प्रति बढ़ा रुझान तथा ममता, नीतिश का मिला समर्थन मुकाबले को और दिलचस्प बना गया है।
करीब 20 सीटें जिनमें बादली, देवली, किराड़ी, सदर बाजार, मटियाला, उत्तम नगर, मुंडका, मटिया महल, पालम, महरौली, लक्ष्मी नगर, कालकाजी, राजौरी गार्डन, कोंडली, सीमापुरी, रोहतास नगर, करावल नगर, सुल्तानपुर माजरा, ओखला, अंबेडकर नगर ऐसी मानी जा रही हैं जहां पर ऊंट जिस करवट पर बैठेगा उसी दल को सत्ता हासिल होगी।
10 सीटें ऐसी जहां लोकसभा में भी नहीं चला मोदी मैजिक
गौर करने वाली बात यह है कि इनमें वे दस वे सीटें भी शामिल हैं जिनमें लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी की आंधी के बावजूद भाजपा पीछे रही थी।
हालांकि यहां पर मतों के ध्रुवीकरण में किसको फायदा पहुंचा व दलों के नेता जनता को समझाने में कितने कामयाब रहे और अगले 24 घंटों में उसका चुनाव मैनेजमेंट कैसा काम करता है, इसपर ऊंट का करवट लेना काफी हद तक तय होगा।
इस बार मुख्य मुकाबले में दिख रही आम आदमी पार्टी ने भाजपा व कांग्रेस का गणित बिगाड़ दिया है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में आप ने अप्रत्याशित रूप से 28 सीटें लेकर दूसरा नंबर हासिल किया था।
यही वजह है कि इस अद्भुत परिणाम से भाजपा व कांग्रेस शुरुआत से आप को हल्के में नहीं ले रही हैं। अब जबकि आप को सर्वे में भाजपा से कड़े मुकाबले में दिखाया जा रहा तो मतदान के 24 घंटे पहले जोड़ तोड़ की घटनाओं में दलों के रणनीतिकार लगे रहे।
मुस्लिम मतदाताओं को रूझान यहां 'आप' की ओर
माना जा रहा है कि 70 विधानसभा सीटों में से आप व भाजपा कड़े मुकाबले के बीच करीब-करीब दो डिजिट में बराबर की सीटों पर हैं। कांग्रेस सिंगल डिजिट से ऊपर किसी भी सर्वे में नहीं बताई जा रही है, लेकिन उसके सामने पिछले चुनाव में जीती गई आठ सीटों पर भी अस्तित्व का संकट है।
दरअसल, इन आठ सीटों में से अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं यहां तक की उम्मीदवार के भरोसे पर भी कांग्रेस ने जीती थी। इस बार इनका रुझान आप की तरफ देखा जा रहा है।
मुस्लिम अगर एक तरफा आप की तरफ गया और ममता, नीतिश व सीपीआई के समर्थन ने असर दिखाया तो आप के परिणाम चौंकाने वाले भी हो सकते हैं, दूसरी ओर डेरा सच्चा सौदा के भाजपा को समर्थन व दिल्ली में उसके दस लाख भक्त होने के दावे पर भाजपा को बड़ी राहत मिली है।
बाबा रामदेव का पहले ही उन्हें खुला समर्थन मिला हुआ है। इन नए समीकरणों के चलते भी आप व भाजपा के बीच मुकाबला और
कड़ा लेकिन दिलचस्प हो गया है।