फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   There is an increased risk of heart disease in women with obesity.

सेहत की बात: मोटापे के साथ महिलाओं में बढ़ रहा दिल का रोग, अलग नीति बनाने की जरूरत; 41 फीसदी से ज्यादा शिकार

Tue, 13 May 2025 07:49 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 13 May 2025 07:49 AM IST
सार

दिल्ली में हुए हृदय रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सम्मेलन में डॉक्टरों ने महिलाओं के लिए अलग से नीति बनाने पर जोर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 41.88 फीसदी महिलाएं मोटापे से पीड़ित हैं।

विज्ञापन
There is an increased risk of heart disease in women with obesity.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

खराब जीवन शैली सहित दूसरे कारणों से महिलाओं में मोटापे के साथ दिल का रोग बढ़ने की आशंका है। इसके रोकथाम के लिए अलग से नीति बनाने की जरूरत है।विशेषज्ञों की माने तो आंकड़े बताते हैं कि भारत में 41.88 फीसदी महिलाएं मोटापे से पीड़ित हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 38.67 फीसदी है। वहीं नेशनल हार्ट फेल्योर रजिस्ट्री के अनुसार देश में हार्ट फेल्योर से एक साल में 22.1 फीसदी मरीजों की मृत्यु हो जाती है। महिलाओं में यह दर पुरुषों की तुलना में अधिक है।

विज्ञापन


दिल्ली में हुए हृदय रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सम्मेलन में महिलाओं में मोटापा और हृदय विफलता की समस्या की रोकथाम के लिए नीति बनाने पर सहमति बनी। साथ ही इलाज, जांच और रोकथाम के तरीके महिलाओं के हिसाब से बदलने का सुझाव दिया गया। इस सम्मेलन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने भी अपनी बात रखी। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि एक राष्ट्रीय रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें भारत में महिलाओं की हृदय देखभाल के लिए वैज्ञानिक और विशेष दिशा तय की जाएगी।
विज्ञापन


कार्यक्रम के दौरान डॉ. एचके चोपड़ा ने कहा कि मोटापा अब सिर्फ सुंदरता या जीवनशैली से जुड़ी बात नहीं रही। 41 फीसदी से ज्यादा भारतीय महिलाएं मोटापे की शिकार हैं। यह सिर्फ वजन नहीं है। यह हृदय विफलता, स्ट्रोक और अचानक मृत्यु का कारण बन सकता है। महिलाओं में यह वसा अंदर ही अंदर हार्मोन और शरीर की सूजन को बदल देती है, जो शुरुआती स्टेज में दिखाई नहीं देती।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं डॉ. विवेक कुमार ने कहा कि अब अधिक महिलाएं गंभीर हृदय समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रही हैं, लेकिन इनके लक्षण आम तौर पर पुरुषों जैसे नहीं होते, जिससे बीमारी की पहचान देर से होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed