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अंगदान कर दूसरों की जिंदगी में जान फूंक रही महिलाएं

Tue, 08 Mar 2016 08:41 AM IST
शाहनवाज आलम /अमर उजाला, नई दिल्ली
शाहनवाज आलम /अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 08 Mar 2016 08:41 AM IST
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The women in the lives of others breathe life organ donation
महिलाएं कर रही ज्यादा नेत्रदान

‘जिंदगी जिंदादिली का नाम है’। इसकी मिसाल समाज के लिए महिलाएं बन रही हैं। मां हो या सास, पत्नी हो या बहन, महिलाएं ही सबसे ज्यादा अंगदान कर रही हैं। 

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जरूरत पड़ने पर बिना अपनी जिंदगी की परवाह किए अंगदान कर अपनों की जिंदगी में जान फूंक रही है। इंडियन ट्रांसप्लांट रजिस्ट्री के मुताबिक जीते जी अंगदान करने वालों में 61 फीसदी महिलाएं हैं।
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जबकि, साइबर सिटी के कई अस्पतालों में अंगदान करने वाले महिलाओं की प्रतिशत इससे ज्यादा है। जो अपने परिवार के लिए अंगदान कर कुर्बानी दे रही हैं और फिर एक अंग के सहारे अपनी जिंदगी परिवार के लिए सुपुर्द कर देती हैं।
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गुड़गांव के अंग प्रत्यारोपण करने वाले अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक पति की जान बचाने के लिए किडनी देने वाली 81.53 फीसदी पत्नियां होती हैं, जबकि महज 18.47 फीसदी पति ही किडनी देकर अपनी पत्नी की जान बचाते हैं।

2008 से 2012 के बीच 18.46 फीसदी डोनर पत्नी थी, जो अब बढ़कर 44.12 फीसदी पहुंच गई हैं। एनसीआर के अस्पतालों की बात करें तो यह प्रतिशत अब 52.48 पहुंच गया है।

डॉक्टरों की मानें तो जरूरत पड़ने पर पत्नी या मां ही सबसे पहले आती हैं। अंग प्रत्यारोपण अधिनियम भी सबसे पहले फर्स्ट डिग्री रिलेटिव को प्राथमिकता देता है। इसमें पत्नी, मां-बाप या बच्चे पहले आते हैं।

The women in the lives of others breathe life organ donation
नेत्रदान

इसके बाद भाई-बहन या सास आती है, लेकिन अमूमन केस में पुरुष डरपोक साबित होते हैं। औरतों को जरूरत होने पर सास या उसकी मां ही आगे आती है।  2014 से अब तक गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में करीब 290 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं।

इनमें 70 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं। फोर्टिस अस्पताल के नेफ्रोलॉजी एंड रेनल ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ. सौरभ पोखरियाल बताते हैं कि 2013 से लेकर अब तक 200 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है।

इनमें 63 फीसदी महिलाएं होती हैं। इनमें 78 फीसदी पत्नियां है, जो अपने पति की जान बचाने के लिए किडनी देती है। जबकि 11 फीसदी मां-बाप या बहन आगे आती है। आर्टिमिस अस्पताल के वरिष्ठ लीवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. रामदीप रे कहते हैं हर व्यक्ति में दो किडनी होती है। पुरुषों की कार्यशैली और खानपान की वजह से कई बार दोनों किडनी फेल हो जाती हैं।

ऐसे में किसी अंगदाता की जरूरत होती है। एक किडनी के सहारे में जिंदगी चल सकती है। वर्ष 2015 में 46 किडनी ट्रांसप्लांट किए। इसमें चार ब्रेन डेड को छोड़कर अधिकांश महिलाओं ने अंगदान दिए हैं।
 
समाजशास्त्री डॉ. परवेश जिंदल का कहना है कि महिलाएं ज्यादा त्याग करती हैं। प्यार और केयर करने के गुण महिलाओं में ज्यादा होते हैं। इसके अलावा अधिकांश तौर पर महिलाएं पति पर निर्भर होती हैं। मौत होने की सूरत में बेवा होकर समाज का डर और महिलाओं का आत्मनिर्भरता की कमी भी उन्हें अंगदान के लिए मजबूर करता है।

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