दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात मामले में कोर्ट ने एम्स को दिया पैनल बनाने का निर्देश
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गर्भपात की इच्छा जाहिर करने वाली दुष्कर्म पीड़िता के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने एम्स को चार सदस्यों का पैनल बनाने और पीड़िता की जांच करने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट ने यह पूछा है कि क्या गर्भपात करने से पीड़िता की जान को कोई खतरा होगा या नहीं। पेश मामले में दुष्कर्म पीड़िता ने अपने 24 से 26 सप्ताह पुराने भ्रूण का गर्भपात करवाने की अनुमति मांगी है।
नाबालिग पीड़िता की ओर से उसके पिता ने याचिका दायर कर गर्भपात करवाने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे एक अन्य मामले में दुष्कर्म पीड़िता के 24 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात करने की अनुमति प्रदान की थी।
'गर्भपात नहीं करवाया जाता तो क्या उसकी जिंदगी को कोई खतरा है'
जस्टिस एके पाठक ने दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल से संतोषजनक रिपोर्ट न मिलने पर एम्स को जांच पैनल बनाने का निर्देश दिया है। इस पैनल में तीन महिला रोग विशेषज्ञ व एक मनोवैज्ञानिक को रखने का निर्देश हाईकोर्ट ने दिया है। यह पैनल पीड़िता की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देगा।
हाईकोर्ट ने एम्स के एमएस को निर्देश देकर पूछा कि साढ़े सोलह साल की पीड़िता की मानसिक व शारीरिक स्थिति के मद्देनजर यह जांच की जाए कि अगर गर्भपात नहीं करवाया जाता तो क्या उसकी जिंदगी को कोई खतरा है।
अगर गर्भपात करवाया जाता है तो क्या परिणाम हो सकते हैं। कोर्ट ने पीड़िता को 27 जुलाई को एम्स में डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा है कि अगर पीड़िता का गर्भपात करवाया जाता है तो उसके रहने की व्यवस्था एम्स में की जाए।