ट्रेनें चलने से घर पहुंचने की राह हुई आसान, लेकिन अभी टिकटों की किल्लत
- नौकरीपेशा और व्यवसाय करने वाले जता रहे खुशी
- हालांकि रेलवे स्टेशन पर तत्काल और करंट टिकट नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई है
- लोकल ट्रेनें नहीं चलने से आसपास के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
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विस्तार
लॉकडाउन के बीच रेलवे ने ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया है। 230 स्पेशल ट्रेनों के चलने से लोगों की जिंदगी भी पटरी पर लौटनी शुरू हो गई है। लॉकडाउन में फंसे उन लोगों के लिए सबसे राहत की खबर है जो अपना व्यवसाय व नौकरी छोड़कर फंसे हुए थे। ऐसे तमाम लोग अब अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। वहीं श्रमिक, मजदूर, पर्यटक व छात्र अपने-अपने गृह प्रदेशों को पहुंच कर चैन की सांस ले रहे हैं। दिल्ली के स्टेशनों पर कुछ इसी तरह की खुशी लोगों के चेहरे पर दिखीं।
हालांकि रेलवे स्टेशन पर तत्काल और करंट टिकट नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई है। वहीं लोकल ट्रेनें नहीं चलने से आसपास के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को बड़ी संख्या में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से यात्री गुजरात के लिए रवाना हुए। इसमें आसाम, बिहार, झारखंड, यूपी समेत अन्य प्रदेशों के ज्यादातर लोग शामिल थे। यात्रियों से बातचीत में पता चला कि सभी लॉकडाउन में फंसे हुए थे जबकि उनकी नौकरी, व्यवसाय सब गुजरात में है। ऐसे में यात्रियों का कहना था कि ट्रेन चलने से उनकी भी जिंदगी पटरी पर अब लौट आएगी।
नहीं मिल रहा तत्काल टिकट
रेलवे ने पहले केवल ऑनलाइन रिजर्वेशन शुरू किया था, लेकिन इसके बाद काउंटर रिजर्वेशन भी शुरू कर दिया है। तत्काल रिजर्वेशन की सुविधा भी स्पेशल ट्रेनों में शुरू कर दी गई, लेकिन हैरत की बात है कि तत्काल टिकट राजधानी के मुख्य स्टेशनों पर नहीं दिए जा रहे है। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर व पूछताछ केंद्र पर यात्रियों से स्पष्ट कह दिया जा रहा कि रेलवे की तरफ से तत्काल टिकट देने का दिशा-निर्देश नहीं है जबकि मंत्रालय का कहना है कि आदेश जारी कर ऑनलान व ऑफलाइन तत्काल टिकट की सुविधा दी जा रही है। ट्रेनों में करीब 25-30 प्रतिशत आरक्षित बर्थ और सीट तत्काल कोटे के लिए निर्धारित रहते हैं। जिनकी बुकिंग ट्रेन छूटने के समय से एक दिन पहले होती है। सुबह दस बजे से एसी और 11 बजे से स्लीपर श्रेणी के टिकटों की बुकिंग शुरू हो जाती है। स्लीपर के लिए सामान्य दर के अलावा 150 और एसी के लिए 300 रुपये अधिक देना पड़ता है।
करंट काउंटर पर भी लोग हो रहे निराश
कई लोगों को अचानक से यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे लोगों के लिए रेलवे स्टेशन पर करंट काउंटर बने है। सीट खाली होने पर 50 रुपये अतिरिक्त देने पर आरक्षित टिकट यहां से मिल जाते है। दूसरा आरक्षण चार्ट बनने के बाद यानी ट्रेन छूटने के 2 घंटा पहले से इस काउंटर पर टिकट की सुविधा मिलती है। लेकिन इन दिनों इस काउंटर पर भी टिकट नहीं मिल पा रहा है। स्टॉफ का कहना है कि ट्रेनों की संख्या कम होने से सीट खाली ही नहीं रहती है।
बुकिंग से ज्यादा निरस्त कराने वालों की भीड़
रेलवे स्टेशनों पर इन दिनों टिकट बुक कराने वालों से ज्यादा निरस्त कराने वालों की भीड़ लग रही है। आरक्षित टिकट काउंटर पर काफी कम लोग रहे जबकि पूर्व में बुक किए गए टिकट या कोरोना महामारी की वजह से टिकट निरस्त कराने वालों की तादाद ज्यादा थी। लाइन में लगे असलम खान ने बताया कि महामारी के दौर में परिवार के साथ यात्रा करना उचित नहीं है।
कनेक्टिंग ट्रेन के यात्री हो रहे परेशान
कनेक्टिंग ट्रेन के यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। दरअसल यात्रियों को एयरपोर्ट की तर्ज पर ही स्टेशन के प्लेटफार्म में एक घंटे पहले प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में अन्य राज्यों से दिल्ली पहुंचे यात्रियों को परिसर में ही घंटों बीताना पड़ता है। बड़ी संख्या में पुरानी दिल्ली स्टेशन पर यात्री बंगाल व आसाम से यात्रा कर सुबह पहुंचे थे। उनकी अगली ट्रेन गुजरात जाने के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे थी। यात्री मीना रहेजा का कहना था कि स्टेशन में प्रवेश ही नहीं मिल रहा है। सभी विश्रामालय प्लेटफार्म पर बने हुए है। ऐसे में यात्रियों को विश्रामालय में बैठने की इजाजत नहीं मिल पा रही है।
टिकट के सॉफ्टवेयर में बदलाव
यात्रा के लिए अब गंतव्य जगह का भी पता यात्रियों को देने का नियम अनिवार्य कर दिया गया है। प्रोफार्मा में पूरा पता, मकान नंबर, गली नंबर, कॉलोनी, तहसील का पूरा विवरण देना पड़ रहा है। सेंटर फार रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम ने आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर में बदलाव कर दिया है। इसी तरह काउंटर से मिलने वाले टिकट के साफ्टवेयर में भी बदलाव किया गया है।
60 लाख मजदूरों को पहुंचाने में रेलवे बना मददगार
लॉकडाउन की वजह से जगह-जगह फंसे करीब 60 लाख मजदूरों को उनके गृह प्रदेश पहुंचाने में रेलवे ने अहम भूमिका निभाई है। एक मई मजदूर दिवस के दिन से बड़ी संख्या में श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाकर रेलवे ने मजदूरों की राह आसान की। रेल मंत्रालय के डाटा के अनुसार इस दौरान 4197 ट्रेनें चलाई गई। सिर्फ मई में 50 लाख से ज्यादा लोग पहुंचाए गए। श्रमिक स्पेशल के अलावा रेलवे द्वारा 12 मई से 15 जोड़ी विशेष राजधानी ट्रेनों और 1 जून से 100 जोड़ी विशेष मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का समयसारणी के हिसाब से परिचालन शुरू कर दिया गया है।