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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The voices pleading for help gradually became silent

Delhi NCR News: मदद की गुहार लगाती आवाजें धीरे-धीरे हो गई खामोश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2024 07:00 PM IST
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गीता काॅलोनी में आग लगने से चार की मौत का मामला
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पार्किंग में आग लगते ही मनोज और राकेश का परिवार हुआ कैद
मदद के लिए चिल्लाते रहे लोग पर चाहकर भी नहीं हो सकी मदद
शुजात आलम
नई दिल्ली। बृहस्पतिवार तड़के करीब सवा पांच बजे पड़ोसियों की आंख खुली तो बाहर से चिल्लाने की आवाज आ रही थीं। लोग बाहर निकले तो रोंगटे खड़े हो गए। मकान नंबर-65 की पार्किंग में भयंकर आग लगी थी। आग की लपटों के बीच ग्राउंड फ्लोर पर बने फ्लैट से मदद की गुहार लगाई जा रही थी। राकेश और मनोज जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे।
कुछ ही देर बाद मदद की गुहार लगाती आवाजें धीरे-धीरे खामोश होती चली गईं। दरअसल राकेश और मनोज के फ्लैट के दरवाजे पर पार्किंग बनी हुई थी। आग लगी तो वहां से बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। परिवार ने दरवाजा बंदकर बचने का प्रयास किया, लेकिन हीट और धुएं की वजह से उनका दम घुट गया।
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पुलिस का कहना था कि दोनों मासूमों समेत चारों की मौत झुलसने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई। हीट की वजह से उनके शरीर हल्के काले पड़े हुए थे। इस फ्लैट में बचे बाकी तीन लोग राकेश, उसकी पत्नी बेबी और राकेश के छोटे भाई नंदू की हालत नाजुक बनी हुई है। परिजन उनके ठीक होने के लिए दुआएं कर रहे हैं।
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हादसे में जान गंवाने वाले मनोज के साढ़ू वीरेश कुमार ने बताया कि मूलरूप से लहेरियासराय, दरभंगा, बिहार के रहने वाले मनोज की दो माह पूर्व ही शास्त्री नगर निवासी सुमन से शादी हुई थी। सुमन का परिवार शास्त्री नगर में ही रहता है। करीब दो माह पूर्व मनोज और उसके बड़े भाई राकेश ने किराए का फ्लैट लिया था।
तीनों भाई और उनका परिवार यहां रह रहा था। नंदू अविवाहित है। तीनों भाई घड़ौली डेयरी फॉर्म एरिया में बच्चों की साइकिल बनाने वाली एक फैक्टरी को चलाते थे। हादसे के समय राकेश, उसकी पत्नी बेबी, इनकी दो बेटियां सृष्टि, सुजाता और नंदू एक कमरे में थे। दूसरे कमरे में मनोज और सुमन मौजूद थे।
वीरेश ने बताया कि मनोज के माता-पिता बिहार में रहते हैं, वह वहां से चल दिए हैं। शुक्रवार को उनके आने के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। फिलहाल शव सब्जी मंडी मोर्चरी में सुरक्षित रखवाए गए हैं। उधर सुमन की मां राधा और पिता हरवंश का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना था कि बेटी जीवन की खुशियां देखे बिना ही चली गई।
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यदि समय पर न निकलते लोग तो हो सकता था बड़ा हादसा...

जिस समय इमारत में आग लगी उस समय बिल्डिंग के नौ फ्लैट में 45 से ज्यादा लोग मौजूद थे। समय रहते ज्यादातर लोगों की आंख खुल गई और वह छत पर पहुंच गए। बाद में पड़ोसी के मकान से वह सकुशल नीचे आ गए। पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर कुछ लोग फंस गए जिनको दमकल कर्मियों व पुलिस ने निकाल लिया।
एक दमकल अधिकारी ने बताया आग लगने के बाद वह पार्किंग से होते हुए पहली मंजिल के दरवाजों तक पहुंच गई, लेकिन आग अंदर नहीं पहुंच पाई। इससे पहले ही उस पर काबू पा लिया गया। पार्किंग में लगी आग की वजह से ऊपरी मंजिलों पर जबरदस्त हीट और धुंआ पहुंचा, जिसकी वजह से लोगों को दिक्कत हुई।
यदि छत का गेट बंद होता था हादसा बड़ा हो सकता था। सीढि़यों के रास्ते नीचे से बचकर निकलना नामुमकिन था। ऐसे में सभी शुक्र मना रहे हैं कि समय पर लोग सुरक्षित निकल गए। ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट में रहने वाले राकेश और मनोज का परिवार आग में फंस गया और सबसे ज्यादा जान-माल का उनका ही नुकसान हुआ।
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मौके पर सीपीआर देकर बचाई युवक की जान...

आग लगी तो पहली मंजिल की सामने की ओर रहने वाले आकिब, उसकी पत्नी सफाकत और ढाई माह की बेटी इसरा, पहली मंजिल के पीछे की ओर रहने वाला प्रशांत, दूसरी मंजिल पर जागृत और तीसरी मंजिल पर बुलबुल और रजनी फंस गए। आग पर काबू पाने के बाद जब इनको निकाला गया तो प्रशांत की सांस नहीं थी। फौरन उसे मौके पर सीपीआर दिया गया तो उसकी सांसें लौटीं। इसके बाद फौरन एंबुलेंस की मदद से उसे अस्पताल भेजा गया। अब उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। बाकी मनोज और सुमन की सांसें भी थम चुकी थी। उनको भी मौके पर सीपीआर दिया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उनको अस्पताल भेज दिया गया।
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दमकल कर्मियों को मौके पर पहुंचने में हुई खासी दिक्कत...

दमकल विभाग के एडीओ सुमित तहलान ने बताया कि 5.27 बजे सूचना मिलते ही करीब नौ गाड़ियां घटना स्थल की ओर रवाना हो गईं। सरोजिनी पार्क की जिस इमारत में आग लगी थी, वहां तक पहुंचने में खासी दिक्कत हो रही थी। जगह-जगह लोगों ने गाड़ियां खड़ी की गई थी, जिसकी वजह से घटनास्थल पर पहुंचने में परेशान हो रही थी।

ऐसे में तुरंत फैसला करते हुए गाड़ियों को बाहर खड़ा छोड़कर मौके पर करीब 150 मीटर पाइप जोड़कर पानी पहुंचाया गया। इसके बाद आग पर काबू पाया गया। बाकी दमकलकर्मी सीढ़ी लेकर वहां पहुंचे। सीढ़ी लगाकर भी कुछ लोगों को रेस्क्यू कराया गया। दमकल विभाग के मुताबिक 50 मिनट में आग पर काबू पा लिया गया।
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