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मूर्ति बनाकर खड़ा किया बड़ा कारोबार, छोटी उम्र में बने मिसाल
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 11 Feb 2016 02:11 PM IST
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नवीन जब 11 वर्ष के थे, तब उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई। इतनी छोटी सी उम्र में नवीन पर अपने छोटे भाई प्रवीन की भी जिम्मेदारी आन पड़ी।
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ऐसे में पढ़ाई छोड़कर नवीन ने अपना और अपने भाई का पेट भरने के लिए अपने चाचा से कपड़े सिलने का हुनर सीखा। कुछ समय बाद चाचा के साथ ही कपड़े का छोटा सा कारोबार शुरू किया।
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अपनी मेहनत के बल पर नवीन ने इसके बाद 2013 में ‘श्रीबालाजी इंटरप्राइजेज’ नाम से कंपनी खोली। अब 21 वर्षीय नवीन 20 घरों की रोटी-रोजी चला रहे हैं। नवीन ने बताया कि कारोबार से उनकी बचत सालाना 5 से 6 लाख रुपये है।
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कहते हैं कि विपरीत परिस्थितियां भी इंसान को जीने का रास्ता दिखा देती है। कुछ इसी तरह की कहानी एनआईटी-5 के रहने वाले कपिल के साथ हुई। कपिल के पिता की मृत्यु वर्ष 2000 में हो गई थी।
ऐसे में पूरे परिवार का बोझ उसके कंधों पर आ गया। उस वक्त कपिल की उम्र महज दस वर्ष की थी। पढ़ाई छोड़कर उसने मूर्ति बनाने का हुनर सीखा। कपिल पहले मिट्टी की मूर्ति बनाते थे।
इसके बाद उसने राजस्थान जाकर मारबल से मूर्ति बनाने का हुनर सीखा। आज 24 वर्षीय कपिल मार्बल के बड़े कारोबारी हैं। उनका सालाना कारोबार दस लाख से अधिक है।
22 वर्ष की उम्र में बन गए हेल्थ सप्लीमेंट के कारोबारी
यह जरूरी नहीं कि एक किसान का बेटा खेतीबाड़ी में ही अपना भविष्य तराशे। वह एक बड़ा व्यापारी भी बन सकता है। ठीक ऐसे ही सेक्टर-29 के रहने वाले किसान के बेटे सुनील राजपूत की शुरू में एक बड़ा व्यापारी बनने की इच्छा थी, लेकिन घरवाले हमेशा पढ़ाई के लिए दबाव बनाते थे, इसलिए उसने पढ़ाई के साथ-साथ व्यापार शुरू किया।
17 वर्ष की उम्र में सुनील ने पहले छोटे स्तर पर घरवालों से चोरी-छिप्पे हेल्थ सप्लीमेंट बेचने का व्यापार शुरू किया। सुनील ने बताया कि बिजनेस के लिए पैसे की जरूरत थी।
इसके लिए उसने अपनी बाइक बेच दी। आठ हजार रुपये से माल खरीदकर उन्होंने शहर की सभी जिम और कोचों से संपर्क साधकर डोर टू डोर बेचना शुरू किया। आज उनकी उम्र 22 वर्ष है। उनके व्यापार के साथ शहर की 50 से अधिक जिम व कोच जुड़े हुए हैं। सालाना कारोबार करीब 18 लाख रुपये का है।