इन किलर्स को दीपावली से पहले बिछानी थी दस लाशें
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पश्चिमी यूपी और एनसीआर में आतंक का पर्याय बने अनिल दुजाना और बलराम ठाकुर जेल से ही लोगों की सुपारी लेते हैं और फिर अपने शूटरों से मर्डर कराते हैं।
पकड़े गए तीन बदमाशों ने पुलिस को बताया कि दिवाली तक करीब 10 लोगों को मौत के घाट उतारना था। इंतजार था तो बस ऑटोमैटिक हथियारों का जो अभी नहीं आए थे।
यदि हथियार आ गए होते तो बिलासपुर के एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या हो चुकी होती। एसपी संजय सिंह ने बताया कि अजय उर्फ लाड्डे मेरठ कंकरखेड़ा का रहने वाला था और गांव के ही मुकेश की हत्या कर दी थी।
लाखों में लेते थे सुपारी
इसके बाद मेरठ जेल में रहा था जहां पर रोबिन त्यागी और कर्नल गिरी से मुलाकात हुई थी। वहां से बुलंदशहर जेल में शिफ्ट किए गए तो वहां पर बलराम ठाकुर से मुलाकात हो गई।
वहीं पर तय हुआ कि बलराम सुपारी लेगा और अजय हत्या करेगा। इसके बाद बलराम और अनिल दुजाना एक साथ हो गए और मिलकर सुपारी ली जाने लगी।
करीब छह माह पहले जेल से बाहर आने पर अजय की विपिन चौधरी से मुलाकात हुई। दोनों को मुजफ्फरनगर के इसरार ने 15 लाख रुपये में दो लोगों की हत्या करने की सुपारी दी थी।
ऑटोमैटिक हथियारों का इंतजाम नहीं होने से हुई देर
इस हत्याकांड को दिवाली से पहले ही अंजाम देना था मगर ऑटोमैटिक हथियारों का इंतजाम नहीं होने से देर हो रही थी। बुलंदशहर जेल में बंदी रक्षक को मारने के लिए भी बलराम ने सुपारी ली थी।
मेरठ के मवाना में दुकानदार की हत्या के लिए भी 70 हजार रुपये में सुपारी ली थी। उसे भी दीवाली तक मारना था। मुजफ्फरनगर जेल में बंद कर्नल गिरी ने एक अपराधी के विरोधी को मारने के लिए सुपारी ले रखी थी उसे भी मौत के घाट उतारना था।
मुजफ्फरनगर के एक बदमाश मंसूरपुर निवासी की कोर्ट में पेशी पर मेरठ में हत्या होनी थी। इसके अलावा बिलासपुर निवासी एक व्यापारी की सूरजपुर कोर्ट में हत्या करने की योजना थी जबकि करीब चार से पांच और हत्याओं के लिए जल्द ही आगे सूचना मिल जाती।