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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The road math of the capital will change, congested roads will get a sigh of relief.

Delhi NCR News: राजधानी की सड़कों का बदलेगा गणित, जाम वाले रास्तों को मिलेगी राहत की सांस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 12:14 AM IST
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दिल्ली-एनसीआर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए 31 हजार करोड़ से ज्यादा की सड़क परियोजनाओं पर होगा काम
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एयरपोर्ट से एक्सप्रेसवे तक बनेगा नया हाई-स्पीड ग्रिड, सुरंग और सर्विस रोड नेटवर्क विकसित किए जाएंगे
धौला कुआं, कालिंदी कुंज, महिपालपुर, आश्रम, सिंघु बॉर्डर समेत कई जाम प्वाइंट्स पर निर्बाध दौड़ेगे वाहन

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। राजधानी और एनसीआर की यातायात व्यवस्था अगले कुछ वर्षों में पूरी तरह बदली नजर आएगी। केंद्र और दिल्ली सरकार करीब 31,300 करोड़ रुपये से सात बड़ी सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू करने जा रही है। इन परियोजनाओं के तहत एक्सप्रेसवे लिंक, एलिवेटेड कॉरिडोर, भूमिगत सुरंग और सर्विस रोड नेटवर्क विकसित किए जाएंगे। इनके जरिये दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और देहरादून तक सिग्नल-फ्री और तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की योजना है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की पूरी ट्रैफिक संरचना को नए तरीके से डिजाइन करना है ताकि धौला कुआं, कालिंदी कुंज, महिपालपुर, आश्रम, सराय काले खां और आउटर रिंग रोड जैसे बड़े जाम प्वाइंट्स पर दबाव कम किया जा सके। पहली बार यूईआर-दो, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और नोएडा-फरीदाबाद कॉरिडोर को एक-दूसरे से जोड़कर हाई-स्पीड नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। अब तक दिल्ली में सड़क परियोजनाएं अलग-अलग ट्रैफिक समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाई जाती थीं, लेकिन इस बार एक्सप्रेसवे, सुरंग, एलिवेटेड रोड और सर्विस कॉरिडोर को एकीकृत नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रैफिक को शहर के भीतर फैलने से पहले ही डायवर्ट करना है।
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भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आधुनिक परिवहन ढांचा विकसित करना मकसद
राजधानी को जाममुक्त बनाने, यात्रा समय घटाने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक परिवहन ढांचा विकसित करने के लिए कई बड़ी सड़क और संपर्क परियोजनाओं पर काम शुरू किया जा रहा है। इन योजनाओं में एक्सप्रेसवे लिंक, भूमिगत टनल, एलिवेटेड कॉरिडोर और सर्विस रोड नेटवर्क शामिल हैं। असल में यह केवल नई सड़कें बनाने की योजना नहीं है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की पूरी ट्रैफिक संरचना को नए तरीके से डिजाइन करने की तैयारी है। - रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री
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यूईआर-दो से संबंधित दो परियोजनाओं पर इस साल शुरू होगा काम

सबसे अहम परियोजनाओं में यूईआर-2 एक्सटेंशन परियोजना है। यह अलीपुर के पास यूईआर दो से शुरू होगी और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ेगी। करीब 17 किलोमीटर लंबे और 3,500 करोड़ रुपये लागत वाले इस कॉरिडोर से आईजीआई एयरपोर्ट, बारापुला, मुकरबा चौक, सिंघु बॉर्डर और आश्रम मार्ग पर ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे द्वारका, रोहिणी और गुरुग्राम से देहरादून एक्सप्रेसवे तक सीधा संपर्क मिलेगा। इस साल दिसंबर में काम शुरू होगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को नोएडा और फरीदाबाद से जोड़ने के लिए 65 किमी लंबा नया कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। करीब 7,500 करोड़ रुपये की इस परियोजना से कालिंदी कुंज, सराय काले खां और आउटर रिंग रोड का दबाव घटाने की योजना है। यह भी इस साल दिसंबर में शुरू होगी।



2027 में शुरू होगा एम्स-महिपालपुर-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर

करीब 20 किलोमीटर लंबे, 6-लेन और 5,000 करोड़ रुपये लागत वाले एम्स-महिपालपुर-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर से दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात दबाव कम होगा। इस परियोजना से एम्स, आईएनए, हौज खास, वसंत कुंज, महिपालपुर और गुरुग्राम के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी जबकि धौला कुआं, महरौली-गुरुग्राम रोड और राव तुला राम मार्ग पर जाम घटेगा। दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे पर ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ गुरुग्राम से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जाने वाले वाहनों को बेहतर डायवर्जन मिलेगा। एरोसिटी, रंगपुरी, छतरपुर और घिटोरनी की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। परियोजना पर अप्रैल 2027 तक काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। दक्षिण दिल्ली और गुरुग्राम के बीच ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए शिव मूर्ति से नेल्सन मंडेला मार्ग तक भूमिगत सुरंग बनाई जाएगी। इस पर 7000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लगभग 8 किलोमीटर लंबी यह सुरंग द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बिना सिग्नल कनेक्टिविटी देगी। महिपालपुर, रंगपुरी और धौला कुआं क्षेत्र में राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना को केंद्र सरकार की सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) की मंजूरी मिल चुकी है और मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कालिंदी कुंज इंटरचेंज परियोजना से दिल्ली-नोएडा-फरीदाबाद मार्ग पर ट्रैफिक फ्लो बेहतर बनाने की तैयारी है। ओखला बैराज के पास बनने वाले इस इंटरचेंज से नोएडा, जसोला, सरिता विहार और फरीदाबाद के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी।

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किन इलाकों को मिलेगी सबसे ज्यादा राहत

परियोजना------------- प्रभावित क्षेत्र

--शिव मूर्ति-नेल्सन मंडेला टनल--- धौला कुआं, महिपालपुर, रंगपुरी

--कालिंदी कुंज इंटरचेंज------ नोएडा, सरिता विहार, फरीदाबाद

--एम्स-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर---- एम्स, आईएनए, हौज खास

--यूईआर-2 एक्सटेंशन-------सिंघु बॉर्डर, आश्रम, मुकरबा चौक

--नोएडा-फरीदाबाद कॉरिडोर------- सराय काले खां, आउटर रिंग रोड

--दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे लिंक---द्वारका, यूईआर-2 कॉरिडोर, आईजीआई एयरपोर्ट, गुरुग्राम

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--कितनी लागत, कितनी लंबाई...

परियोजना------लंबाई----लागत

--यूईआर-2 एक्सटेंशन ---17 किमी ---3,500 करोड़

--नोएडा-फरीदाबाद कॉरिडोर-- 65 किमी --7,500 करोड़
--दिल्ली-कटरा लिंक--- 17 किमी --1,500 करोड़
--शिव मूर्ति टनल-- 8 किमी --7,000 करोड़

--एम्स-गुरुग्राम एलिवेटेड रोड --20 किमी --5,000 करोड़

--यूईआर-2 सर्विस रोड --26 किमी --6,500 करोड़

--कालिंदी कुंज इंटरचेंज-- 500 मीटर --300 करोड़
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