फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The Rage Triangle behind the liver is a high-risk area during stomach cancer surgery.

Delhi NCR News: पेट के कैंसर की सर्जरी में लिवर के पीछे का ‘रेज ट्रायंगल’ हाई रिस्क एरिया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 08:22 PM IST
विज्ञापन
एम्स ने 205 मरीजों का किया अध्ययन, 94.6 प्रतिशत में दिखाई देने वाला कैंसर पूरी तरह या लगभग पूरी तरह हटाया गया
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पेट के अंदर फैले कैंसर की जटिल सर्जरी के दौरान लिवर के पीछे और उसके आसपास के हिस्सों की सावधानी से जांच बेहद जरूरी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के विशेषज्ञों के हालिया शोध में ऐसे ही एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्र को हाई रिस्क एरिया बताया गया है। शोधकर्ताओं ने इसे ‘रेज ट्रायंगल’ नाम दिया है। हालांकि, यह शरीर की कोई आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त अलग संरचना नहीं है, बल्कि सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी बरतने वाले क्षेत्र के तौर पर इसे परिभाषित किया गया है।
एम्स के डॉ. बीआरए-इर्च के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. एमडी रे और उनके एमसीएच छात्र डॉ. अनिक राठी के इस शोध में बताया गया है कि पेट के एडवांस कैंसर की सर्जरी में सिर्फ दिखाई देने वाले कैंसर को हटाना पर्याप्त नहीं है। लिवर के पीछे, उसके नीचे और डायाफ्राम के पास कैंसर के छोटे हिस्से छिपे हो सकते हैं। इन्हें स्कैन में भी आसानी से पहचानना संभव नहीं होता। ऐसे में सर्जरी के दौरान इन हिस्सों की व्यवस्थित जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
विज्ञापन


205 मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन

शोध के लिए जनवरी 2014 से दिसंबर 2025 के बीच एम्स में बड़ी सर्जरी कराने वाले 205 मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इनमें ओवेरियन कैंसर से पीड़ित मरीज भी शामिल थे। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने लिवर को सावधानी से अलग कर उसके पीछे और आसपास के छिपे हिस्सों की जांच की।
विज्ञापन
विज्ञापन


शोध में पाया गया कि 205 में से 194 मरीजों यानी करीब 94.6 प्रतिशत में दिखाई देने वाले कैंसर को पूरी तरह या लगभग पूरी तरह हटाया जा सका। इनमें 178 मरीज ऐसे थे, जिनमें दिखाई देने वाली पूरी बीमारी निकाल दी गई, जबकि 16 मरीजों में थोड़ी बीमारी बाकी रह गई।


शुरुआती 100 मरीजों में सात बार नस में चोट
सर्जरी के दौरान नौ मरीजों में राइट हेपेटिक वेन नाम की महत्वपूर्ण नस में चोट लगी। इनमें शुरुआती 100 मरीजों में सात मामले सामने आए, जबकि बाद के 105 मरीजों में दो मरीजों में यह जटिलता हुई। शोधकर्ताओं के अनुसार, बाद के मामलों में चोट की दर कम हुई, लेकिन यह अंतर सांख्यिकीय रूप से निश्चित नहीं माना गया। जिन मरीजों में इस नस को चोट लगी, उनमें सर्जरी के दौरान औसतन अधिक खून बहा। साथ ही, उन्हें आईसीयू में भी अपेक्षाकृत अधिक समय तक रहना पड़ा। शोधकर्ताओं के अनुसार, ‘रेज ट्रायंगल’ में महत्वपूर्ण नसों के साथ लिवर और इन्फीरियर वेना कावा के आसपास का हिस्सा आता है। इसलिए इस क्षेत्र में सर्जरी करते समय अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। इससे दिखाई देने वाले कैंसर को सुरक्षित तरीके से हटाने में मदद मिल सकती है और गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed