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राष्ट्रपति ने फिर दोहराई देश की विविधता की रक्षा करने की बात

Sat, 31 Oct 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 31 Oct 2015 11:05 PM IST
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The President reiterated the country's diversity quality.

भारत 130 करोड़ लोगों का देश है, जहां 120 भाषाएं व हजारों बोलियां बोली जाती हैं और लोग कई धर्मों को मानते हैं। एकता में विविधता हमारी पहचान है।

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हमारा देश सहनशीलता के बल पर आगे बढ़ा है और इसकी परीक्षा कई बार हो चुकी है। इस सहनशीलता को संजोकर रखना होगा। ये बातें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली हाईकोर्ट के स्वर्ण जयंती समारोह में शनिवार को कहीं। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में समारोह की थीम ‘सब के लिये न्याय’ पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि न्यायपालिका हमारे लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ और संविधान की व्याख्या करने वाली है।
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हमारे देश में अनेक लोग सामाजिक आर्थिक ढांचे के सबसे निचले स्तर पर हैं और उन्हें सस्ता न्याय मिलना चाहिए। लोकतंत्र के तीनों स्तंभों के कार्य व शक्तियों के संबंध में उन्होंने कहा कि न्यायिक सक्रियता से इन अंगों की शक्तियों में टकराव नहीं होना चाहिए।
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दूसरी ओर न्यायपालिका की स्वायत्तता से भी समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या भी एक चुनौती है। तकनीक के प्रयोग से अदालतों व आम लोगों के लिये न्यायिक प्रक्रिया सरल बन सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट के 50 साल

The President reiterated the country's diversity quality.

49 साल पहले आज ही के दिन 1966 में दिल्ली हाईकोर्ट की शुरुआत मौलाना आजाद रोड से हुई थी। उसके बाद हाईकोर्ट को ट्रावनकोर हाउस व उसके बाद पटियाला हाउस में शिफ्ट कर दिया गया।

पटियाला हाउस से हाईकोर्ट को शेरशाह रोड पर स्थित मौजूदा भवन में 25 सितंबर 1976 को शिफ्ट किया गया था। हाईकोर्ट की शुरुआत में केवल तीन जजों ने काम करना शुरू किया था।

कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति एचएल दत्तू, दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायमूर्ति जी. रोहिणी, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के न्यायिक अधिकारी, वरिष्ठ वकीलों, पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। हाईकोर्ट के भित्ति चित्रों को डिजाइन करने वाले मशहूर पेंटर सतीश गुजराल भी विशेष अतिथियों में शामिल हुए।

न्यायपालिका के लिये अनुशासन व स्व नियंत्रण जरूरी-
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने अपने संबोधन में कहा कि दूसरे देशों की तरह हमारा देश भी विकास की शुरुआत में है। इसके बाद भी न्यायपालिका ने उच्च मानकों को बनाए रखा है और यह मानक आगे भी बनाए रखे जाने चाहिए।

न्यायपालिका में अनुशासन व स्व नियंत्रण होना चाहिये। जज अपने काम को एक मिशन की तरह करें। लोगों का विश्वास न्यायपालिका में है और यह विश्वास कायम रहना चाहिए।

'आम आदमी के विश्वास को कायम रखे न्यायपालिका'

The President reiterated the country's diversity quality.

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि निचली अदालतों में न्याय मिलने में काफी समय लगता है। देरी से मिला न्याय, न्याय नहीं होता। देश की न्यायिक प्रक्रिया को त्वरित बनाया जाना चाहिए।

अभी तक इस काम में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी आड़े आती थी। हमारी सरकार इस कार्य के लिए हर तरह की मदद करने के लिये तैयार है। अगर इस एक साल में हम इसकी शुरुआत कर सके तो यह बड़ी बात होगी।

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि राजधानी से एक प्रयोग की शुरुआत करें कि हर मुकदमे की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सबसे ज्यादा जरूरी है और उससे किसी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हमारी सरकार कभी इसमें दखलंदाजी नहीं करेगी।

न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास के बारे में उन्होंने कहा इस समय जो देश के हालात हैं जिसमें आम आदमी को विधायिका व कार्यपालिका से शिकायत होती है तो वह न्यायपालिका की ओर देखता है। उसे न्यायपालिका पर बहुत भरोसा होता है और ऐसे संकट के समय में न्यायपालिका उसके इस विश्वास को बचा कर रख सकती है।

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