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Delhi: महिलाओं को आजीविका से जोड़ेगी सरकार ये अनोखी मुहिम, 10 मेट्रो स्टेशनों पर होंगे 'अर्पण' दान केंद्र
Tue, 14 Jul 2026 08:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 08:53 PM IST
सार
परियोजना के तहत दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर अर्पण केंद्र बनाए जाएंगे। जहां लोग पुराने कपड़े दान कर सकते हैं। एकत्र किए गए कपड़ों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। उपयोगी कपड़ों से एसएचजी की महिलाएं बैग, सजावटी सामान और परिधान तैयार करेंगी।
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सीएम रेखा गुप्ता
- फोटो : @gupta_rekha
विस्तार
दिल्ली में पुराने कपड़ों के रिसाइक्लिंग और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने ‘ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ शुरू किया है। सचिवालय में मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन, राज्य शहरी आजीविका मिशन और टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग संस्थाओं क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन व रेस्पन के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसका उद्देश्य उपयोग किए गए कपड़ों को लैंडफिल में जाने से रोकना, टेक्सटाइल कचरे को कम करना और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। साथ ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। डीएलडब्ल्यूओ परियोजना का नेतृत्व करेगी। सीएम ने कहा कि भविष्य में अर्पण केंद्रों का विस्तार दिल्ली के सभी क्षेत्रों तक किया जाएगा।
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दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनेंगे अर्पण केंद्र
परियोजना के तहत दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर अर्पण केंद्र बनाए जाएंगे। पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग स्टेशनों पर सुबह सात से शाम सात बजे तक कपड़े जमा किए जाएंगे। यहां कियोस्क भी लगाए जाएंगे जहां अपसाइक्लिंग से बने उत्पाद बेचे जा सकेंगे।
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उपयोगी कपड़ों से महिलाएं बैग, सजावटी सामान और परिधान तैयार करेंगी
एकत्र किए गए कपड़ों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। उपयोगी कपड़ों से एसएचजी की महिलाएं बैग, सजावटी सामान और परिधान तैयार करेंगी। अनुपयोगी कपड़ों को रिसाइकिल कर नया धागा और कच्चा माल बनाया जाएगा। पूजा-पाठ के वस्त्रों का सम्मानपूर्वक पुन: उपयोग होगा। संग्रह केंद्रों का संचालन एसयूएलएम से जुड़ी महिलाएं करेंगी। उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर दान का डिजिटल पंजीकरण कर सकेंगे और उन्हें तुरंत डिजिटल प्रमाणपत्र मिलेगा। पूरी प्रक्रिया की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए सेंट्रल डैशबोर्ड बनाया गया है।