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ओखला पक्षी विहार में गूंजने लगी चहचहाहट

Wed, 07 Dec 2016 12:31 AM IST
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 07 Dec 2016 12:31 AM IST
सार

पर्याप्त भोजन व शांति के लिए प्रबंधन ने किए खास इंतजाम
5 हजार पक्षी दिसंबर के पहले सप्ताह में पहुंचे
22 हजार पक्षी जनवरी की शुरू तक आने की उम्मीद

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the Okhla Bird Sanctuary filled with Chirping
ओखला पक्षी विहार में लौटे पक्षी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महीनों से सूने पड़े ओखला पक्षी विहार की रंगत लौटने लगी है। दिसंबर के पहले सप्ताह में ही खाली पड़े घोंसलों में पक्षियों ने बसेरा जमा लिया है। झील में विचरण व किनारों बैठे पक्षी रंगत बढ़ाने में पूरा योगदान दे रहे हैं। एक सप्ताह में यहां पांच हजार से ज्यादा पक्षी आ चुके हैं।
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इनकी चहचहाहट से पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर है। साइबेरियन व यूरोप के देशों के पक्षी यहां पहुंचे है। इनके पर्याप्त भोजन व शांति के लिए पक्षी विहार प्रबंधन ने खास इंतजाम किए हैं। घोंसलों को भी नया रूप दिया गया है।
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बर्ड वाचर डे पर कुल 1035 पक्षी देखे गए थे। चार दिन बाद यह संख्या बढ़कर पांच हजार के पार पहुंच चुकी है। रेंजर आफिसर ईश्वर चंद ने बताया कि दिसंबर के अंत तक यह आंकड़ा हजार भी नहीं पहुंचा था। पिछले साल जो पक्षी आए यहां प्रवास के लिए आए थे वह दादरी, धनौरी व गुड़गांव वेटलैंड की तरफ चले गए थे।
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लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। जो पक्षी यहां आ रहा है, वह यहीं प्रवास कर रहा है। पक्षियों को विचरण व सहवास करने के लिए एकांत माहौल भी दिया जा रहा है। साइबेरियन क्षेत्र से पहुंचे पक्षी साइबेरियन क्षेत्र से इस बार नार्दन सोब्लर, ग्रेले गूज, कामन कूट, पोरार्ड पोचार्ड, वीजन, वीजन डक, गडवाल, कामन पील, गल्स पक्षी यहां आ चुके हैं।

झुंड में प्रवास करने वाले इन पक्षियों की संख्या ज्यादा है

the Okhla Bird Sanctuary filled with Chirping
पक्षी विहार में मौजूद पक्षी - फोटो : अमर उजाला

इसमें सबसे ज्यादा संख्या में नार्दन सोब्लर है। झुंड में प्रवास करने वाले इन पक्षियों की संख्या ज्यादा है। इनके भोजन के लिए शैवाल व कीट भी पर्याप्त मात्रा में पक्षी विहार की झील में मौजूद हैं। इनके झुंड को झील में बनाए गए टापू पर देखा जा रहा है। वहीं, लोगों को गाइड भी मुहैया कराया जा रहा है।

जो इन पक्षियों के बारे में जानकारी दे रहा है। अनुमान है कि जनवरी की शुरुआत तक यहां करीब 22 हजार के आसपास पक्षी आ जाएंगे। इसकी एक वजह प्रदूषण में हुई कमी व गाड़ियों के अंदर आने पर रोक लगाया जाना है।

​कुछ समस्याएं बरकरार
पक्षी विहार के ऊपर से जाने वाली हाइटेंशन लाइन।
साफ-सफाई के बाद भी झील में गंदा पानी आना।
तीन मुख्य सड़कों से गाड़ियों का आना-जाना।
प्रदूषण के साथ-सा तेज हॉर्न की आवाज।
देखरेख के लिए पर्याप्त स्टाफ का न होना।
सबसे ज्यादा बजट की कमी।

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