फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The movement gained momentum as soon as Wangchuk was hospitalized and subsided only after the demands were met

Delhi NCR News: वांगचुक के अस्पताल जाते ही आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, मांगे पूरी होने के बाद ही थमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 08:25 PM IST
विज्ञापन
अनशन के 21वें दिन वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया, इससे पहले 28 दिन तक चले आंदोलन में जंतर मंतर पर लोगों की भागीदारी दिख रही थी कम
विज्ञापन

---18 जुलाई को अस्पताल भेजते ही आंदोलन ने लिया नया मोड़, दोपहर तक भर गया प्रदर्शन स्थल, दूसरे दिन देश के दूसरे हिस्से से पहुंचने लगे थे समर्थक, सोमवार संसद मार्च के दौरान दिखा असर
---पुलिस की कार्रवाई के बाद भी लोगों का नहीं थम रहा जोश, शुक्रवार अनशन तोड़ने के बाद भी दिखी लोगों की दिखी भारी भागीदारी, शनिवार को मांग पूरी होने के बाद ही थमा आंदोलन
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के कामयाबी की तरफ बढ़ने की रफ्तार प्रदर्शन ने 28वें दिन तेज हुई। अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को 21वें दिन अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ उमड़ पड़ी। इससे आंदोलन का स्वरूप और दायरा दोनों व्यापक हो गया। जबकि इससे पहले मौके पर लोगों की भागीदारी सीमित दिखी। दिलचस्प यह कि बृहस्पतिवार देर रात अनशन टूटने के बाद भी लोगों का जोश कम नहीं हुआ। शुक्रवार दिन भर जंतर मंतर से जुड़ी सभी सड़कों पर लोगों की लाइन लगी रही। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ आंदोलन केंद्र सरकार से अपनी मांगें पूरी करवाने के बाद ही शनिवार थमा।
विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल, नीट परीक्षा में पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से काकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर आंदोलन की शुरुआत की थी। सोशल मीडिया के जरिये शुरू हुए आंदोलन का पहला पड़ाव उस वक्त आया, जब 28 जून को भूख हड़ताल पर बैठ गए। लगातार 20 दिनों तक अनशन करने से उनकी सेहत गिरती जा रही थी। वहीं, 20 जुलाई को सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान भी कर रखा था। इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस नाटकीय अंदाज में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए अनशन के 21वें दिन 18 जुलाई सुबह सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया। पुलिस से सफेद चादर से ढककर उनको प्रदर्शन स्थल से हटाया। इसकी तस्वीरें सुबह से वायरल हो गईं।
दिन चढ़ने के साथ ही जिस तरह से सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट की रफ्तार बढ़ती गई, लोगों में उसी तरीके से इसको लेकर नाराजगी भी दिखी। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस पर अपना सख्त एतराज जताया। साथ ही आंदोलन को समर्थन देने के लिए कई नेता जंतर मंतर भी पहुंचे। इसी बीच अस्पताल से सोनम वांगचुक का संदेश मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने इस आंदोलन को आजादी का दूसरा आंदोलन करार दिया है। वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता के साथ-साथ, उनके संदेश ने आंदोलन में शामिल लोगों को और अधिक मजबूती प्रदान की है। सोमवार संसद मार्च के दौरान सड़कों पर भी इसका असर दिखा। दिल्ली पुलिस की बैरीकेडिंग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी लोगों को रोक नहीं सके और वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद भवन के दरवाजे तक पहुंचने में कामयाब रहे।

पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद भी लोगों को नहीं थमा उत्साह
आंसू गैस और लाठीचार्ज की कार्रवाई भी लोगों के हौसलों को नहीं तोड़ सकी। शाम जंतर मंतर से प्रदर्शनकारियों का मंच हटा देने के बाद देर रात तक दोबारा वह जंतर मंतर पहुंच गए। मंगलवार को भी लोगों की भारी भीड़ जंतर मंतर पर दिखी। बुधवार व बृहस्पतिवार लुटियंस दिल्ली के ज्यादातर मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद हुजूम कम नहीं हुआ। जंतर मंतर के साथ संसद मार्ग, टॉलस्टाय मार्ग, जनपथ पर हर तरफ आंदोलनकारी दिख रहे थे। पूरा इलाका शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मांग के नारे से गूंजता रहा। इसमें छात्रों के अलावा नौकरीपेशा, बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ के बीच से यह बात भी उठी कि अब मुद्दा सिर्फ कुछ परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक जन समर्थन प्राप्त कर चुका है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक मुखर रूप ले सकता है, और सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

अस्पताल जाने से पहले आंदोलन पड़ा था सुस्त
सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करवाने से पहले आंदोलन सुस्त पड़ा हुआ था। पेपर लीक सरीखे मुद्दे से भावनात्मक जुड़ाव होने के बावजूद जंतर मंतर पर लोगों की भागीदारी बेहद कम दिखी थी। इस दौरान लोगों की संख्या एक हजार भी पार नहीं कर रही थी। इसमें कई बार ऐसा भी हुआ कि प्रदर्शन स्थल तकरीबन खाली दिखता था। इसको लेकर दबी जुबान से सीजेपी पदाधिकारियों ने कई बार चिंता जाहिर की थी।

----
अनशन तोड़ने के बाद भी नहीं थमा जोश, मांग पूरी करवाकर ही हुए वापस
सोनम वांगचुक का बृहस्पतिवार देर रात अनशन टूटने के बाद भी प्रदर्शनकारियों को जोश कम नहीं हुआ। शुक्रवार उनका जोर यही रहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिए बगैर वह वापस नहीं लौटेंगे। शनिवार दोपहर बाद आंदोलन को बड़ी कामयाबी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ मिली। इसके बाद केंद्रीय मंत्रियों के साथ सीजेपी आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब आंदोलनकारी पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि सरकार न उसकी सारी मांगें पूरी कर ली हैं, उसके बाद ही वह जंतर मंतर से वापसी को तैयार हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed