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केंद्रीय मंत्री का विवादित बयान, 'चंडीगढ़ में दो कौड़ी के नेता लेते हैं फैसला'

Fri, 08 Jul 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Fri, 08 Jul 2016 12:00 AM IST
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The minister's controversial statement, "the leader of worthless take a decision in Chandigarh"
इंद्रजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बुधवार को कहा कि चंडीगढ़ में बैठे दो कौड़ी के नेता और अफसर गुड़गांव के बारे में फैसले लेते हैं। पिछली सरकार में पैसा गुड़गांव कमाकर देता था और उसे सरकार रोहतक और अन्य जिलों में लगा देती थी।

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हम नहीं चाहते कि यहां की जनता भविष्य में भी छली जाए। इसलिए यहां विकास प्राधिकरण (जीडीए) बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो कौड़ी के नेताओं, अफसरों और बाबुओं ने गुड़गांव में नगर निगम बनवाया, लेकिन वहां पार्षदों को अधिकार नहीं दिए।
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एक करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की फाइल अब भी चंडीगढ़ पास होने के लिए जाती है। जीडीए बनाने की पिछली सरकार की मंशा ही नहीं थी।

भेदभाव के मुद्दे पर ही राव ने वोट बटोरा था

The minister's controversial statement, "the leader of worthless take a decision in Chandigarh"

बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा के खिलाफ दक्षिण हरियाणा के विकास में भेदभाव को मुद्दा बनाकर राव ने वोट बटोरा था, लेकिन हुड्डा के खिलाफ उनकी तल्खी अभी तक कम नहीं हुई है।

स्मार्ट सिटी एवं कुछ अन्य मुद्दों पर राव की मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी नाराजगी जग जाहिर है। हालांकि राव ने दो कौड़ी के बयान पर कहा कि उन्होंने हुड्डा सरकार के बारे में यह बयान दिया है।

इंद्रजीत बृहस्पतिवार को हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) में ‘गुड़गांव विकास प्राधिकरण की जरूरत है या नहीं’ विषय पर आयोजित सेेमिनार के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले सेमिनार में उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए जीडीए बेहद जरूरी है।

70 फीसदी राजस्व गुड़गांव से जाता है

The minister's controversial statement, "the leader of worthless take a decision in Chandigarh"
इंद्रजीत सिंह

जीडीए से बढ़कर एनसीआर विकास प्राधिकरण का गठन भी किया जा सकता है। जिसमें गुड़गांव के साथ-साथ फरीदाबाद मेवात, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, रोहतक व झज्जर को शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का 70 फीसदी राजस्व यहां से जाता है। गुड़गांव के विकास की योजनाएं यहीं बननी चाहिए। जो भी अधिकारी यहां नियुक्त हों उनकी जवाबदेही तय हो। बहु विकल्प वाली एजेंसियों से शहर का विकास नहीं हो सकता।

एक एजेंसी अच्छी तरह से शहर का विकास करने में सक्षम होती है। इंद्रजीत ने कहा कि यह शहर आर्थिक, औद्योगिक और आईटी बिजनेस के मामले में प्रदेश की ही नहीं देश की रीढ़ बनता जा रहा है। ऐसे में यहां पर त्वरित विकास हो इसके लिए प्राधिकरण का गठन जरूरी है। इस मौके पर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप भी मौजूद रहे।

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