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हादसे ने खत्म कर दी तीन पीढ़ियां, घर में नहीं बचा कोई पुरूष

Wed, 10 Feb 2016 01:02 AM IST
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:02 AM IST
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The incident ended three generations

दिलशाद गार्डन इलाके में मंगलवार तड़के हुए दिल-दहला देने वाले हादसे ने परिवार की तीन पीढ़ियां समाप्त कर दी। हादसे में प्रदीप के साथ ही इकलौते बेटे और पोते की मौत हो गई। अब घर में कोई भी पुरुष सदस्य नहीं बचा है।

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बेटा-बहू, पति और पोते को खोकर सरोज सुधबुध खो चुकी हैं। वे बार-बार बस यह कह रही थीं कि भगवान उन्हें भी आग में जला देता, तो यह दिन देखने को नहीं मिलता।

घटना के बाद यहां पहुंचने वालों की भी आंखें भर जाती हैं। पूरे दिलशाद गार्डन इलाके में मातम सा माहौल है, जिसने भी हादसे के बारे में सुना वह घटना स्थल की ओर भागा।
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घर की दुकान को प्रदीप की पत्नी सरोज संभालती थीं

The incident ended three generations

प्रदीप के रिश्तेदार सुनील गुलाठी ने कहा कि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि हंसता-खेलता परिवार एक पल में बिखर जाएगा। सब कुछ अच्छा चल रहा था।


राजन की दिलशाद गार्डन इलाके में बॉबी ड्राइक्लीनर और एसके ड्राइक्लीनर के नाम से दो दुकानें थी। प्रदीप डीटीसी में टिकट चेकर के पद पर तैनात थे। घर की दुकान को प्रदीप की पत्नी सरोज संभालती थीं।

दूसरी वाली दुकान को राजन संभालता था। प्रदीप ने बड़ी बेटी कोमल की शादी कर दी थी, वह पति के साथ दूसरी जगह रहती है। छोटी बेटी सेजल गीता कॉलोनी के सेंट लॉरेंस स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। पोता अंशुल उर्फ चीकू ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ रहा था।

पड़ोसियों ने प्यार से अंशुल का नाम रखा था चीकू

The incident ended three generations

बेहद चंचल स्वभाव का अंशुल पूरे मोहल्ले की जान था। पड़ोसियों को अंशुल से इस कदर प्यार था कि उन्होंने उसका प्यार से नाम भी चीकू रख दिया था।


आते-जाते वह सभी को नमस्ते करता था। राजन भी बेहद मिलनसार था। हर किसी के सुखदुख में खड़ा रहता था। परिवार के बारे में बताते हुए पड़ोसियों की आंखें भर जाती हैं।

करीब पांच बजे आग लगने के बाद दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दे दी गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दमकल की गाड़ियां करीब आधे घंटे की देरी से पहुंची।

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दादा भी अपने पोते के जन्मदिन को लेकर काफी उत्साहित थे

The incident ended three generations

हालांकि दमकल विभाग के अधिकारियों ने आरोपों से इंकार किया है। उनका कहना है कि 5:30 बजे आग की सूचना मिली थी, कॉलर ने पता भी गलत दिया था। बावजूद इसके 15 मिनट में दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। वहीं, डीएम विभाग आग लगने की कॉल 5:44 बजे बता रहा है।


इसी माह की 24 तारीख को अंशुल का जन्मदिन था। दादा भी अपने पोते के जन्मदिन को लेकर काफी उत्साहित थे। प्रदीप की बड़ी मंशा थी कि वह ज्यादा से ज्यादा समय अपने पोते के साथ बिताएं।

कुछ ही माह बाद डीटीसी से उनका रिटायरमेंट भी था। ऐसे में वह काफी खुश थे। प्रदीप पोते का जन्मदिन धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रहे थे। अंशुल के कपड़े भी बना लिए गए थे, लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था।

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