जिस बीमारी के लिए कर रहा था जागरूक खुद उसी का शिकार बन गया फरहान
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इसे महज इत्तफाक ही कहेंगे कि जिस डेंगू के लिए फरहान और उसके पिता डॉ. हबीब लोगों को जागरूक कर रहे थे, उसी डेंगू से फरहान जिंदगी की जंग हार गया।
पिछले कई वर्षों से फरहान अपने पिता के साथ मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को आयोजित करवा रहा था। इसी 15 अगस्त को जामिया नगर स्थित नई बस्ती में फरहान ने डेंगू जागरूकता के लिए पिता के साथ एक कार्यक्रम किया था।
उसमें ‘डेंगू बचाव ही इलाज’ लिखे पर्चे बांटे थे। उस समय शायद किसी को भी नहीं पता था कि जिस बीमारी के प्रति मासूम लोगों को आगाह कर रहा है, वही बीमारी उसकी जिंदगी लील लेगी।
पिता के साथ लगातार ले रहा था डेंगू जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा
फरहान के पिता डॉ. हबीब-उर-रहमान ने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद उनकी मां ने कहा था कि वह मानवता की सेवा के लिए हमेशा काम करेंगे। लोगों में बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम करेंगे।
इसी बात पर अमल करते हुए वह पिछले कई वर्षों से हमेशा बीमारियों व उनसे बचाव के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। महज चार वर्ष की उम्र से फरहान ने अपने पिता के साथ इस तरह के कार्यक्रमों में जाना शुरू कर दिया था। पिछले कुछ दिनों से डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए फरहान अपने पिता के साथ मिलकर जगह-जगह कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा था।
11 अगस्त से उसे हल्का बुखार था। 15 अगस्त को स्कूल की छुट्टी होने की वजह से फरहान ने अपने पिता से नई बस्ती में कार्यक्रम करने के लिए कहा। फरहान ने घर-घर जाकर पर्चे भी बांटे थे। इसके अगले ही दिन उसकी तबीयत बिगड़ी और रविवार को उसकी मौत हो गई।