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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली जिमखाना क्लब प्रबंधन को जारी किया समन
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सरकार ने कहा- कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं होगी कोई बेदखली कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े विवाद में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को समन जारी करते हुए प्रतिवादियों को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि यदि भविष्य में क्लब परिसर से बेदखली की कोई कार्रवाई की जाती है तो वह पूरी कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस देने के बाद ही की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति देवेंद्र तेजस करिया की पीठ ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए फिलहाल किसी भी अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया। साथ ही मामले को आगे की प्रक्रिया के लिए संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पट्टे की वैधता, सार्वजनिक उद्देश्य और अन्य कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी। पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सार्वजनिक परिसर कानून के तहत कोई कार्रवाई होती है तो संबंधित पक्ष उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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तत्काल बेदखली नहीं...स्थायी पट्टा व्यवस्था समाप्त करने से जुड़ा था आदेश : मेहता
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 22 मई को जारी पत्र केवल क्लब की स्थायी पट्टा व्यवस्था समाप्त करने और जमीन पर दोबारा अधिकार लेने से जुड़ा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई तत्काल बेदखली आदेश नहीं था।
केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर सरकार दोबारा कब्जा नहीं ले सकती :सिंघवी
क्लब के सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में तर्क दिया कि स्थायी पट्टा लगभग स्वामित्व के समान होता है और केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर सरकार दोबारा कब्जा नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है।
-वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी कहा कि बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के किसी संस्था या व्यक्ति को बेदखल नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार की कार्रवाई को संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले से जुड़ा है। याचिका क्लब के सदस्यों, कर्मचारियों के कल्याण संघ और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से दायर की गई है। विवाद की शुरुआत 22 मई को जारी उस पत्र से हुई, जिसमें क्लब को 5 जून तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था। केंद्र का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक है। यह भूमि वर्ष 1928 में स्थायी पट्टे पर क्लब को दी गई थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े विवाद में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को समन जारी करते हुए प्रतिवादियों को आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि यदि भविष्य में क्लब परिसर से बेदखली की कोई कार्रवाई की जाती है तो वह पूरी कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस देने के बाद ही की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति देवेंद्र तेजस करिया की पीठ ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए फिलहाल किसी भी अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया। साथ ही मामले को आगे की प्रक्रिया के लिए संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पट्टे की वैधता, सार्वजनिक उद्देश्य और अन्य कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी। पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सार्वजनिक परिसर कानून के तहत कोई कार्रवाई होती है तो संबंधित पक्ष उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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तत्काल बेदखली नहीं...स्थायी पट्टा व्यवस्था समाप्त करने से जुड़ा था आदेश : मेहता
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 22 मई को जारी पत्र केवल क्लब की स्थायी पट्टा व्यवस्था समाप्त करने और जमीन पर दोबारा अधिकार लेने से जुड़ा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई तत्काल बेदखली आदेश नहीं था।
केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर सरकार दोबारा कब्जा नहीं ले सकती :सिंघवी
क्लब के सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में तर्क दिया कि स्थायी पट्टा लगभग स्वामित्व के समान होता है और केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर सरकार दोबारा कब्जा नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है।
-वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी कहा कि बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के किसी संस्था या व्यक्ति को बेदखल नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार की कार्रवाई को संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले से जुड़ा है। याचिका क्लब के सदस्यों, कर्मचारियों के कल्याण संघ और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से दायर की गई है। विवाद की शुरुआत 22 मई को जारी उस पत्र से हुई, जिसमें क्लब को 5 जून तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था। केंद्र का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक है। यह भूमि वर्ष 1928 में स्थायी पट्टे पर क्लब को दी गई थी।