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Delhi NCR News: दो लाइसेंस का झंझट होगा खत्म, एफएसएसएआई लाइसेंस से चलेगा खाद्य कारोबार
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एमसीडी में स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस व्यवस्था बदलने की तैयारी, 96 श्रेणियों को जोखिम के आधार पर बांटने का प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में खाद्य कारोबार करने वालों को अब एमसीडी और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। एमसीडी ने दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एफएसएसएआई का पंजीकरण या लाइसेंस ही एमसीडी का मानित स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस माना जाएगा। हालांकि, कारोबारियों को एमसीडी के नियमों के अनुसार निर्धारित स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस शुल्क देना होगा।
एमसीडी स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक, वर्तमान में स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के दायरे में आने वाले 96 तरह के कारोबारों को उनकी प्रकृति और स्वास्थ्य जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में एफएसएसएआई के दायरे वाले सभी खाद्य कारोबार शामिल होंगे। इनके लिए एफएसएसएआई का पंजीकरण या लाइसेंस एमसीडी के मानित स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।
दूसरी श्रेणी में ऐसे कारोबार होंगे, जिनमें स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े जोखिम न्यूनतम हैं। इन्हें अलग स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस से छूट देते हुए मानित सामान्य स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के तहत कवर किया जाएगा। तीसरी श्रेणी में ऐसे कारोबार रखे जाएंगे, जिनमें स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े महत्वपूर्ण जोखिम हैं और जो एफएसएसएआई या किसी अन्य नियामक व्यवस्था के दायरे में नहीं आते। इन पर मौजूदा स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस व्यवस्था लागू रहेगी।
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प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा समेत सभी नियमों का पालन करना होगा
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि एफएसएसएआई लाइसेंस को मानित एमसीडी लाइसेंस मानने से अन्य वैधानिक नियमों में छूट नहीं मिलेगी। कारोबारियों को प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा और अन्य संबंधित नियमों का पालन करना होगा। जहां पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है, वहां खाद्य कारोबारों के लिए पीएनजी से संचालन का प्रावधान भी लागू रहेगा।
गलत जानकारी देने पर होगी कार्रवाई
गलत जानकारी देकर लाइसेंस लेने या उसके दुरुपयोग पर एमसीडी अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। नियमों के उल्लंघन पर सुधार के लिए अधिकतम तीन सप्ताह का समय दिया जाएगा। अनुपालन नहीं होने पर एफएसएसएआई पंजीकरण/लाइसेंस की मानित एमसीडी लाइसेंस की स्थिति रद्द की जा सकेगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में खाद्य कारोबार करने वालों को अब एमसीडी और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। एमसीडी ने दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत एफएसएसएआई का पंजीकरण या लाइसेंस ही एमसीडी का मानित स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस माना जाएगा। हालांकि, कारोबारियों को एमसीडी के नियमों के अनुसार निर्धारित स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस शुल्क देना होगा।
एमसीडी स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक, वर्तमान में स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के दायरे में आने वाले 96 तरह के कारोबारों को उनकी प्रकृति और स्वास्थ्य जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में एफएसएसएआई के दायरे वाले सभी खाद्य कारोबार शामिल होंगे। इनके लिए एफएसएसएआई का पंजीकरण या लाइसेंस एमसीडी के मानित स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।
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दूसरी श्रेणी में ऐसे कारोबार होंगे, जिनमें स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े जोखिम न्यूनतम हैं। इन्हें अलग स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस से छूट देते हुए मानित सामान्य स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के तहत कवर किया जाएगा। तीसरी श्रेणी में ऐसे कारोबार रखे जाएंगे, जिनमें स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े महत्वपूर्ण जोखिम हैं और जो एफएसएसएआई या किसी अन्य नियामक व्यवस्था के दायरे में नहीं आते। इन पर मौजूदा स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस व्यवस्था लागू रहेगी।
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प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा समेत सभी नियमों का पालन करना होगा
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि एफएसएसएआई लाइसेंस को मानित एमसीडी लाइसेंस मानने से अन्य वैधानिक नियमों में छूट नहीं मिलेगी। कारोबारियों को प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा और अन्य संबंधित नियमों का पालन करना होगा। जहां पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है, वहां खाद्य कारोबारों के लिए पीएनजी से संचालन का प्रावधान भी लागू रहेगा।
गलत जानकारी देने पर होगी कार्रवाई
गलत जानकारी देकर लाइसेंस लेने या उसके दुरुपयोग पर एमसीडी अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। नियमों के उल्लंघन पर सुधार के लिए अधिकतम तीन सप्ताह का समय दिया जाएगा। अनुपालन नहीं होने पर एफएसएसएआई पंजीकरण/लाइसेंस की मानित एमसीडी लाइसेंस की स्थिति रद्द की जा सकेगी।