दिल्ली हिंसाः 22 गलियों को मजहबी सरहदों में बांट पहरा दे रही है युवाओं की टोली
- उपद्रवियों के डर से महालक्ष्मी एन्क्लेव के निवासियों ने खींची लक्ष्मण रेखा
- शांति के दावे के बावजूद खत्म नहीं हुई दिल की दरारें
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उत्तर-पूूूर्वी दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाके में भले ही प्रशासन माहौल शांत होने का दावा कर रहा हो, लेकिन हिंसा वाले इलाके की गलियों में दिलों की दरारें अब भी खत्म नहीं हुई है। शिव विहार के महालक्ष्मी एन्क्लेव के रहने वाले उपद्रवियों से इस कदर भयभीत हैं कि उन लोगों ने कॉलोनी की 22 गलियों को ही मजहब की सरहदों में बांट लिया है। गली की दूसरी तरफ एक समुदाय विशेष की आबादी है, जिसे देखते हुए बीच में लोगों ने खुद ही लक्ष्मण रेखा खींच दी है।
खींची रेखा के आगे हिंदू परिवार नहीं जा रहा, जबकि मुस्तफाबाद की तरफ से मुस्लिम परिवार महालक्ष्मी कॉलोनी की ओर नहीं आ रहा। इन सरहदों के दोनों ओर कई परिवार सड़कों पर कुर्सी रखकर अपने लोगों की रखवाली करने का दावा कर रहा है।
शिव विहार के महालक्ष्मी एन्क्लेव कॉलोनी में लोग अब भी दहशतजदा हैं। गली नंबर दो में रहने वाले राजकुमार (60) बताते हैं कि उपद्रवियों के डर से वह चार दिन बाद घर शुक्रवार सुबह घर से बाहर निकले हैं। हिंसा के दौरान पूरा परिवार घर में बंधक बनकर छिपा बैठा था।
उन्होंने कहा कि भले ही इलाके में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया हो, लेकिन हिंसा का डर हर वक्त सताता है। इसे देखते हुए कॉलोनी के हिंदू परिवार ने कुल 22 गलियों की सुरक्षा के लिए चार-चार युवाओं की टोली बनाई है।
इन लोगों ने गली से मुस्तफराबाद की ओर जाने वाले रास्ते को लाइन ऑफ कंट्रोल कहना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ से उपद्रवियों के डर से कॉलोनीवासी डर-डर के जी रहे हेें। डर के बीच कॉलोनी वासियों ने अपनी सुरक्षा के लिए युवाओं की टोली बना ली है, जो रात-दिन गलियों में गश्त कर रही है।
गली नंबर तीन स्थित मंदिर के पुजारी ज्योति वाले गुरुजी बताते हैं कि रात के वक्त गली की दूसरी तरफ से नारेबाजी की जाती है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस मुख्य सड़कों पर तो तैनात खड़ी है, लेकिन गलियों में आने से कतराती हैै। गलियों में रहने वाले लोग अब भी उपद्रवियों से भयभीत हैं। इसलिए लोगों ने खुद ही ईंट- पत्थर लगाकर दीवारों की सरहद बना डाली।
मंदिर की कर रहे रखवाली
शिव विहार इलाके में 30 साल पुुराने मंदिर को उपद्रवियों ने नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, जिसकी वजह से पुरुष और महिलाओं ने खुद ही सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है। रात भर लोग मंदिरों के बाहर बैठ रहे हैं।