डीजल कैब को सड़कों से हटाने के लिए सरकार ने मांगी मोहलत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीजल टैक्सी ड्राइवरों के विरोध और लगातार दूसरे दिन जगह-जगह जाम के कारण हो रही आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से डीजल टैक्सियों को सड़कों से हटाने के लिए और समय देने की गुहार की है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दो दिनों के भीतर यह बताने के लिए कहा है दिल्ली-एनसीआर से डीजल टैक्सियों को हटाने केलिए उसकेपास क्या योजना है। हालांकि पीठ ने कहा कि जब कभी भी इस तरह केफैसले लिए जाते हैं तो लोगों को असुविधा होती है।
दोपहर बार दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ केसमक्ष विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि डीजल टैक्सियों को सड़कों से हटाने के लिए उन्हें और मोहलत दी जाए।
वरिष्ठ वकील ने कहा कि टैक्सी ड्राइवरों के विरोध और उनकेद्वारा जगह-जगह जाम लगाए जाने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि 30 हजार डीजल कैब सड़कों से हट जाने से राजधानीवासियों को समस्या हो रही है।
हम भी यह नहीं चाहते कि ह्यूमन प्रोबलम हो
वरिष्ठ वकील ने बताया कि सरकार प्रदूषण को लेकर गंभीर है लेकिन वह चाहती है कि एक नियत समय के भीतर चरणबद्ध तरीकेसे डीजल कैब को सड़कों से दूर किया जाए। जिस पर पीठ ने कहा कि हम भी यह नहीं चाहते कि ह्यूमन प्रॉब्लम हो।
हालांकि पीठ ने कहा कि जब कभी इस तरह केफैसले लिए जाते हैं तो लोगों असुविधा होती है। बाद में हालांकि पीठ ने दिल्ली सरकार से पूछा कि इसे लेकर आपकी क्या योजना है। आप हमें अपना रोडमैप बताइए, फिर सुनवाई होगी। पीठ ने सरकार को शाम चार बजे तक अपनी विस्तृत योजना बताने के लिए कहा।
लेकिन चार बजे वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि तमाम स्टेक होल्डर से बुधवार और गुरुवार को बैठक होनी है। उन्होंने कहा कि वह दो दिन बाद अपनी कार्य योजना अदालत केसमक्ष रखेंगे। जिसकी पीठ ने इजाजत दे दी।
मालूम हो कि गत शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने डीजल कैब को सीएनजी में परिवर्तित करने की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि हमनें इसकेलिए पर्याप्त समय दिया था।