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ईएसआई कार्ड होल्डर्स के लिए अच्छी खबर, ऑनलाइन होगा अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 20 Mar 2016 07:13 PM IST
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ऑनलाइन हुआ अस्पताल
- फोटो : फाइल फोटो
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ईएसआई कार्ड होल्डरों के लिए अच्छी खबर है। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दो स्मार्ट कार्ड बनाने की योजना के साथ ईएसआई की सभी डिस्पेंसरियों व अस्पतालों को भी ऑनलाइन करने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके बाद मरीजों की यूनीक कार्ड से पहचान होगी। आने वाले चार महीने में सेक्टर-9 स्थित ईएसआई अस्पताल समेत अन्य डिस्पेंसरियां में यह लागू होगा।
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जल्द ही सभी ईएसआई डिस्पेंसरियां, क्षेत्रीय कार्यालय व उपक्षेत्रीय कार्यालय भी ऑनलाइन हो जाएंगे। ऐसे में गुड़गांव के 1.50 लाख से अधिक कार्ड होल्डरों को फायदा होगा। ईएसआई डिस्पेंसरियों व अस्पताल के ऑनलाइन होने के कारण मरीज सहित सभी डिस्पेंसरियों व अस्पतालों का डाटा भी ऑनलाइन फीड हो जाएगा। इससे विभाग को इन डिस्पेंसरियों व अस्पतालों की स्थिति, वास्तविकता व जरूरत का पता भी साथ-साथ चलता रहेगा।
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दरअसल, ईएसआई स्वास्थ्य निदेशालय ने सभी अस्पतालों को ऑनलाइन करने की योजना तैयार की है, जिससे अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बार-बार नए टेस्ट कराने व दवाइयां खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉक्टर एक क्लिक पर मरीज की पुरानी केस हिस्ट्री को जान सकेगा। इससे उपचार में होने वाले फिजूल खर्ची से मरीज को राहत मिल सकेगी। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। अस्पताल की सभी जानकारी उसमें फीड होगी।
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ऑनलाइन होने से यह मिलेगा लाभ
डिस्पेंसरियों व अस्पतालों के ऑनलाइन होने से यहां इलाज के लिए आने वाले मरीज का डाटा व उसके चल रहे इलाज व दवाइयों का डाटा भी ऑनलाइन कंप्यूटर में दर्ज होगा। इससे यदि डॉक्टर बदल भी जाता है तो भी दूसरे डॉक्टर को पता चल सकेगा कि मरीज का क्या और किस चीज का इलाज चल रहा है। मरीज की दवाई से लेकर हर रिपोर्ट ऑनलाइन ही दर्ज रहेगी। इसे देश के किसी भी कोने में बैठा ईएसआई का डॉक्टर मरीज की आइडेंटिटी के आधार पर देख सकेगा। कर्मचारी को यदि कोई मेडिकल लीव या मेडिकल बेनीफिट भी दिए गए या दिए जाने हैं तो वह भी ऑनलाइन ही दर्ज रहेंगे।
प्रत्येक मरीज को मिलेगा यूनीक कोड
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सॉफ्टवेयर लांच होने के बाद अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज को एक यूनीक कोड दिया जाएगा। इस कोड की मदद से मरीज जब भी किसी दूसरे अस्पताल में जाएगा, तो वहां डॉक्टर उससे यूनीक कोड पूछेंगे। इसकी मदद से डॉक्टर को मरीज के उपचार के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी। इसमें दवा, टेस्ट, डॉक्टर समेत सभी ट्रीटमेंट की जानकारी शामिल होगी। सॉफ्टवेयर लांच होने के बाद जल्द ही वेबसाइट भी शुरू होने के आसार हैं।
ऐसे होगा मरीजों का ऑनलाइन डाटा
ओपीडी में आने वाले मरीजों का डाटा ऑनलाइन करने के लिए सभी डॉक्टरों के कक्ष में एक-एक कंप्यूटर दिया जाएगा। मरीज की जानकारी के लिए डॉक्टर फीड करेंगे। इंटर्न डॉक्टर भी मरीज की बीमारी और डॉक्टर द्वारा दी गई दवा को फीड करेगा। मेडिकल लैब से ही मरीज के यूनीक कोड के जरिये रिपोर्ट फीड की जाएगी। जूनियर डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में फार्मासिस्ट यह काम करेंगे।
निदेशालय की टीम सर्वे कर चुकी है। अब सॉफ्टवेयर वहां से आएगा। डॉक्टरों को यूनीक आईडी दी गई है। अस्पताल को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया मुख्यालय स्तर से की जा रही है। जल्द ही मरीजों का डाटा भी ऑनलाइन होगा।
-डॉ. सुनीता चौधरी, उप-चिकित्सा अधीक्षक