{"_id":"6ab3f2e34418fd2e850750a8","slug":"the-girl-returned-home-healthy-after-spending-three-months-on-a-ventilator-delhi-ncr-news-c-503-1-del1005-1210-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: तीन महीने वेंटिलेटर पर रहने के बाद बच्ची स्वस्थ होकर घर लौटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: तीन महीने वेंटिलेटर पर रहने के बाद बच्ची स्वस्थ होकर घर लौटी
विज्ञापन
-हालत गंभीर होने पर उसे दूसरे अस्पताल से एसडीएन अस्पताल रेफर किया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। स्वामी दयानंद अस्पताल (एसडीएन) में करीब तीन महीने तक वेंटिलेटर पर इलाज कराने के बाद एक बच्ची स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई है। गंभीर हालत होने पर उसे दूसरे अस्पताल से एसडीएन अस्पताल रेफर किया गया था। गार्गी नाम की इस बच्ची को 29 जून को अस्पताल की पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में भर्ती किया गया था।
उसे अचानक शरीर में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी हुई थी। गले में खराश और बुखार के बाद उसके हाथ-पैरों में काफी कमजोरी आ गई थी। बाद में उसकी सांस लेने की क्षमता भी प्रभावित हुई और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टरों को गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) की आशंका हुई, जो मांसपेशियों में गंभीर कमजोरी और लकवा कर सकता है। 30 जून को बच्ची को आईवीआईजी का इलाज दिया गया, लेकिन उसकी हालत में तुरंत सुधार नहीं हुआ। लंबे समय तक सांस लेने में मदद की जरूरत को देखते हुए नौ जुलाई को उसकी ट्रेकियोस्टॉमी की गई। इलाज के दौरान उसे एसिनेटोबैक्टर बैक्टीरिया के कारण निमोनिया और रक्त संक्रमण का भी सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक्स के साथ लगातार सांस से जुड़ी समस्याओं और उसकी न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर नजर रखी।
लंबे इलाज के बाद धीरे-धीरे बच्ची की हालत में सुधार शुरू हुआ। उसके हाथ-पैरों की ताकत और मांसपेशियों की स्थिति बेहतर होने लगी। डॉक्टरों ने सीपीएपी और टी-पीस ट्रायल के जरिये धीरे-धीरे वेंटिलेटर की मदद कम की। करीब तीन महीने के इलाज के बाद 21 सितंबर को बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विज्ञापन
बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक गंभीर स्थिति में बच्चे का इलाज करना पूरी टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, रेस्पिरेटरी केयर स्टाफ, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों की सराहना की। डॉक्टरों ने बच्ची की आगे की रिकवरी के लिए नियमित न्यूरोलॉजी, सांस संबंधी जांच और फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। स्वामी दयानंद अस्पताल (एसडीएन) में करीब तीन महीने तक वेंटिलेटर पर इलाज कराने के बाद एक बच्ची स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई है। गंभीर हालत होने पर उसे दूसरे अस्पताल से एसडीएन अस्पताल रेफर किया गया था। गार्गी नाम की इस बच्ची को 29 जून को अस्पताल की पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में भर्ती किया गया था।
उसे अचानक शरीर में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी हुई थी। गले में खराश और बुखार के बाद उसके हाथ-पैरों में काफी कमजोरी आ गई थी। बाद में उसकी सांस लेने की क्षमता भी प्रभावित हुई और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टरों को गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) की आशंका हुई, जो मांसपेशियों में गंभीर कमजोरी और लकवा कर सकता है। 30 जून को बच्ची को आईवीआईजी का इलाज दिया गया, लेकिन उसकी हालत में तुरंत सुधार नहीं हुआ। लंबे समय तक सांस लेने में मदद की जरूरत को देखते हुए नौ जुलाई को उसकी ट्रेकियोस्टॉमी की गई। इलाज के दौरान उसे एसिनेटोबैक्टर बैक्टीरिया के कारण निमोनिया और रक्त संक्रमण का भी सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक्स के साथ लगातार सांस से जुड़ी समस्याओं और उसकी न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर नजर रखी।
विज्ञापन
लंबे इलाज के बाद धीरे-धीरे बच्ची की हालत में सुधार शुरू हुआ। उसके हाथ-पैरों की ताकत और मांसपेशियों की स्थिति बेहतर होने लगी। डॉक्टरों ने सीपीएपी और टी-पीस ट्रायल के जरिये धीरे-धीरे वेंटिलेटर की मदद कम की। करीब तीन महीने के इलाज के बाद 21 सितंबर को बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विज्ञापन
बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक गंभीर स्थिति में बच्चे का इलाज करना पूरी टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, रेस्पिरेटरी केयर स्टाफ, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों की सराहना की। डॉक्टरों ने बच्ची की आगे की रिकवरी के लिए नियमित न्यूरोलॉजी, सांस संबंधी जांच और फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी है।