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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The gang used to send the cheated money to Chinese fraudsters.

Delhi NCR News: झांसी के लिए उपयोगी ठगी की रकम चीनी जालसाजों के पास भेजता था गिरोह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jan 2026 08:08 PM IST
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2.19 करोड़ डिजिटल अरेस्ट की ठगी में पकड़ा गया झांसी का गिरोह
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खाताधारकों को लखनऊ के एक होटल में पैसे वसूलने के लिए रखा था
अब तक 5 गिरफ्तार, अन्य सदस्यों का पता करने के लिए दे रही है दबिश

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स (आईएफएसओ) यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट कर 78 वर्षीय व्यक्ति से 2.19 करोड़ रुपये की ठगी में जिस झांसी के गिरोह का पर्दाफाश किया है, उसके के तार चीनी साइबर जालसाजों से जुड़े हैं। आरोपी चीनी ठगों के बताए ऐप मोबाइल में इंस्टाल करते थे। एप के डाउनलोड होते ही मोबाइल व बैंक खाते के एक्सेस चीनी साइबर जालसाजों के पास चला जाता था। इसके बाद इन बैंक खातों से ठगी की रकम चीन व कंबोडिया के कई सौ बैंक खातों में भेज दी जाती थी। पुलिस को शुरुआती जांच में इनके बैंक खातों में 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम के लेन-देन का पता लगा है।
पुलिस ने इस गिरोह के इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर शॉप के मालिक, डीजे और प्लास्टिक प्लेट निर्माता समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया था कि आरोपियों में 30 वर्षीय दीपेश पाटीदार (मध्य प्रदेश) शामिल है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर शॉप चलाता है। मध्यप्रदेश निवासी 28 वर्षीय अंशुल राठौड़ शादी समारोहों के लिए म्यूजिक सिस्टम उपलब्ध कराता है। उत्तरप्रदेश निवासी 36 वर्षीय श्याम बाबू गुप्ता उत्तर प्रदेश के झांसी में एक छोटा प्लास्टिक प्लेट फैक्ट्री चलाता था। वहीं स्नातक डिग्री धारक 25 वर्षीय राघवेंद्र वर्मा झांसी में बाइक एक्सेसरीज की दुकान चलाता था। 25 वर्षीय देवेश सिंह, आईटीआई डिप्लोमा धारक है और हाल ही झांसी में उसका में बीटेक में दाखिल हुआ है। ये कानून और केंद्र सरकार के अधिकारी बनकर लोगों से पैसे ऐंठते थे।
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26 नवंबर से 4 दिसंबर तक रखा डिजिटल अरेस्ट
पीड़ित ने ठगी ई-एफआईआर 5 दिसंबर को दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार लखनऊ पुलिस मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारी बनकर सुमित मिश्रा के नाम के व्यक्ति ने कॉल किया था। ठग ने कहा कि उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट कर पीड़ित को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और घर से बाहर निकलने या किसी से संपर्क करने से मना किया था। ठगों ने दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में बुजुर्ग से 26 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच 2,19,18,000 रुपये कई बैंक खातों में स्थानांतरित किए।
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खाताधारकों को ले गए थे लखनऊ
दिल्ली पुलिस ने बताया कि दीपेश पाटीदार ने आरोपियों को अपना खाता अंशुल के जरिये उपलब्ध कराया था। झांसी के रहने वाले तीनों आरोपी दीपक और अंशुल को लखनऊ के एक होटल में रखा गया था। ठगी की रकम लेने में दीपक के खाते का ही इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने दीपक व अंशुल को अपने पास कई दिन रखा, ताकि दीपक के मोबाइल पर ओटीपी आए तो इनको मिल जाए। इसके बाद आरोपियों ने दीपक के मोबाइल के एप डाउनलोड की। इसके बाद बैंक खाते का एक्सेस चीनी साइबर जालसाजों के पास चला गया।

सबसे पहले दीपक को किया था गिरफ्तार
इंस्पेक्टर सुनील कुमार व एसआई हरजीत सिंह की टीम ने बैंक लेनदेन और डिजिटल ट्रैकों का विश्लेषण किया। पाटीदार के खाते में 1 करोड़ रुपये ट्रेस होने के बाद उसे दबोचा गया। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अन्य गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस उपायुक्त ने बताया था कि गिरोह म्यूल बैंक खातों, कई परतों में फंड ट्रांसफर और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिये अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल कर चोरी को छिपाता था।
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