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प्रदेश का सबसे पहला आदर्श गांव बदहाल, नहीं है मूलभुत सुविधाएं

Tue, 28 Jun 2016 03:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Tue, 28 Jun 2016 03:26 AM IST
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The first model village in the impoverished territory, not infrastructure
आदर्श गांव का हाल - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश का सबसे पहले आदर्श गांव फिरोजपुर नमक में पक्के रास्ते भी नहीं हैं। करीब 45 वर्ष पहले आदर्श गांव बनाते वक्त जहां इस गांव को शहरों जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं। आज उसी गांव का हाल स्लम से भी बदतर है।

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फिरोजपुर नमक को वर्ष 1970 में आदर्श गांव बनाया गया था। उस समय इस गांव में सीवरेज डाली गई, गांव के रास्तों को चौड़ा कर 24 फीट किया गया, मुख्य रास्तों को तारकोल का बनाया गया।
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गांव में 2 व 3 नंबर सेक्टर स्थापित किए गए इन सेक्टरों में गांव के गरीबों को 30 गुना 90 फीट के प्लॉट आवंटित किए गए। सेक्टरों में 24 फुट चौड़ी रोड, पार्क बनाया गया।
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पेयजल आपूर्ति के लिए गांव पल्ला से पानी की लाइन लाकर गांव के बूस्टर में डाली गई। जहां से गांव में पानी आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इस तरह गांव को शहरों की तर्ज पर सुविधाएं मुहैया कराई गईं।

लेकिन सरकार व प्रशासन की अनदेखी के कारण आज इस गांव का सीवरेज सिस्टम ठप हो चुका है। ग्रामीण अपने घर में गड्डा खोदकर शौचालय का गंदा पानी उसमें एकत्र कर रहे हैं।

तारकोल के बने रास्ते गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। पेयजल आपूर्ति के लिए लाई गई लाइन 10 साल से बंद है। रेनीवेल योजना से गांव के केवल 25 फीसदी आबादी को पेयजल आपूर्ति होती है।

गांव में नहीं है पक्के रास्ते, लोग खरीदते हैं पानी

The first model village in the impoverished territory, not infrastructure
आदर्श गांव का हाल - फोटो : अमर उजाला

बाकी 75 फीसदी आबादी ने अपने घरों में पानी के कुंडे बनवाए हुए हैं और वह उनमें टैंकर से पानी खरीद कर गुजारा करते हैं। गांव में सीनियर सेकेंडरी स्कूल है लेकिन स्टाफ की कमी के कारण वह सिर्फ एक दिखावा है। इस स्कूल में पहली से 12वीं तक करीब 1425 विद्यार्थियों का दाखिला है, जिनमें 55 फीसदी लड़कियां तथा 45 फीसदी लड़के पढ़ रहे हैं। 15 हजार की आबादी वाले गांव में सफाई के लिए 4 सफाई कर्मी हैं।

गांव में हेल्थ सब सेंटर है लेकिन वहां स्टाफ तैनात नहीं है। गांव में सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी ना होना है। गांव के एक तरफ से दिल्ली अलवर रोड है, एक तरफ नूंह पलवल रोड है, एक दिशा में लघु सचिवालय बना हुआ है और एक दिशा में गांव सलंबा बसा हुआ है।

इन हालातों में बरसात के समय गांव में चारों तरफ पानी भर जाता है, जो यहां बीमारियों को न्योता देता है। गांव में पशु अस्पताल है लेकिन वह आजकल सिर्फ ग्रामीणों द्वारा डाले गए कूडे़ के लिए डंपिंग स्टेशन बनकर रह गया है। गांव के रहने वाले सद्दीक, नबाव, अरशद का कहना है कि सरकार ने गांव को सबसे पहला आदर्श गांव तो बना दिया लेकिन उसके बाद इसकी अनदेखी की गई।

गांव के सरपंच डॉक्टर हनीफ खान का कहना है उनसे पहले जो भी सरपंच रहे उन्होंने प्रदेश के सबसे पहले आदर्श गांव की रखवाली भी ढंग से नहीं की। जिसके कारण आज यह हालात है।

जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राकेश मोर का कहना है कि यह गांव करीब 40 - 45 साल पहले आदर्श गांव बनाया गया था। जरूरत के हिसाब से वह सुविधाएं अब इस गांव में नहीं रही हैं। सरकार की योजना है कि हर पंचायत को कम से कम 20 लाख रुपये विकास कार्यों के लिए देगी। जो इस गांव को भी दिए जाएंगे।

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