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कारनामा: केस दर्ज होने से पहले ही सीजर मेमो में लिख दिया एफआईआर नंबर
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- स्पेशल कोर्ट में नकली नोट मामले में आरोपी को बरी किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने नकली भारतीय मुद्रा रखने और चलाने के मामले में एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि पुलिस नेजब्ती दस्तावेजों में एफआईआर नंबर केस दर्ज होने से भी पहले लिख दिया था। राउज एवेन्यू कोर्ट के न्यायाधीश अमित बंसल ने दीपक मंडल को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
नौ अगस्त 2018 की रात खानपुर स्थित डीटीसी बस डिपो के पास स्पेशल सेल की टीम ने दीपक मंडल को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि उसके पास कुल 7.5 लाख रुपये के नकली 2,000 रुपये के नोट मिले थे। अदालत ने पाया कि घटनास्थल का नक्शा और जब्ती संबंधी कई दस्तावेजों पर एफआईआर नंबर उस समय लिखा गया जब एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। यह अनियमितता अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह पैदा करती है। अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित नकली नोटों वाले काले बैग और पॉलीथीन बैग जब्त नहीं किए गए, जबकि वे महत्वपूर्ण सबूत थे।
न्यायाधीश ने पुलिस जांच में अन्य कमियों का भी जिक्र किया। सार्वजनिक जगह पर स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया, उनके मना करने का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया और महत्वपूर्ण अधिकारी निरीक्षक ईश्वर सिंह को गवाह के रूप में पेश ही नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि इन गंभीर खामियों के कारण आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। नतीजतन दीपक मंडल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने नकली भारतीय मुद्रा रखने और चलाने के मामले में एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि पुलिस नेजब्ती दस्तावेजों में एफआईआर नंबर केस दर्ज होने से भी पहले लिख दिया था। राउज एवेन्यू कोर्ट के न्यायाधीश अमित बंसल ने दीपक मंडल को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
नौ अगस्त 2018 की रात खानपुर स्थित डीटीसी बस डिपो के पास स्पेशल सेल की टीम ने दीपक मंडल को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि उसके पास कुल 7.5 लाख रुपये के नकली 2,000 रुपये के नोट मिले थे। अदालत ने पाया कि घटनास्थल का नक्शा और जब्ती संबंधी कई दस्तावेजों पर एफआईआर नंबर उस समय लिखा गया जब एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। यह अनियमितता अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह पैदा करती है। अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित नकली नोटों वाले काले बैग और पॉलीथीन बैग जब्त नहीं किए गए, जबकि वे महत्वपूर्ण सबूत थे।
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न्यायाधीश ने पुलिस जांच में अन्य कमियों का भी जिक्र किया। सार्वजनिक जगह पर स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया, उनके मना करने का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया और महत्वपूर्ण अधिकारी निरीक्षक ईश्वर सिंह को गवाह के रूप में पेश ही नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि इन गंभीर खामियों के कारण आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। नतीजतन दीपक मंडल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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