वोट बैंक के चक्कर में 60 लाख दिल्लीवासियों का हुआ फायदा
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राजधानी में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने वाली है। सबसे बड़ा वोट बैंक अनधिकृत कालोनी में रहता है। तो फिर 2008 और 2013 के चुनाव की तरह चंद दिन पहले सत्ताधारी पार्टी ने हॉट सीट पर अनधिकृत कालोनियों को लाकर बैठा दिया है।
भाजपा, कांग्रेस या आम आदमी पार्टी सब के केन्द्र में इस चुनाव में भी अनधिकृत कालोनी का मतदाता ही रहने वाला है। हालांकि पिछले दो चुनाव में प्रोविजनल सर्टिफिकेट मिलने या नियमन आदेश का बहुत फायदा इन्हें अभी तक नहीं मिला है।
राजधानी में जब नियमन केलिए आवेदन मंगाए गए तो 1639 कालोनियों का आवेदन मिला लेकिन 1218 को जांच के बाद प्रोविजन सर्टिफिकेट मिला। फिर जांच हुई तो कई ऐसी कालोनियां थी जो वास्तव में जमीन पर थी ही नहीं, उनके प्रमाणपत्र रद्द किए गए। वहीं दिल्ली सरकार ने 2013 में जिन 895 कालोनियों का नियमन किया था, वहां न तो रजिस्ट्री शुरू हुई और न ही लेआउट प्लान पास होना शुरू हुई।
राजधानी में ज्यादातर विस में अनधिकृत कालोनी है। कई जगह जीत हार का फैसला वहीं करते है। पिछले चुनाव में इन कालोनियों में आम आदमी पार्टी को वोट ज्यादा मिले थे।
कांग्रेस की तर्ज पर फायदा लेने की कोशिश
भाजपा ने कांग्रेस के 2008 के तर्ज पर अनधिकृत कालोनी के मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि हॉट सीट पर बैठे अनधिकृत कालोनी के मतदाता किसके पक्ष में वकालत करते हैं।
भाजपा की अगुवाई वाली केन्द्रीय कैबिनेट ने दिल्ली में अनधिकृत कालोनियों के नियमन की 31 मार्च, 2002 तक की कटऑफ तारीख को बढ़ाकर 1 मार्च, 2014 कर दिया है।
सरकार का दावा है कि मार्च, 2002 से जून, 2014 तक कटऑफ बढ़ाने के बाद 2000 कालोनियों केनियमन का रास्ता साफ हो जाएगा। यह भी बताया गया है कि दिशा निर्देशों में भी परिवर्तन किया गया है।
हालांकि परिवर्तन क्या हैं इसकी जानकारी नहीं दी गई है। गत दिनों दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्य सचिव के साथ शहरी विकास मंत्री और शहरी विकास सचिव की बैठक में मुद्दों पर चर्चा हुई थी। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि केन्द्र से स्वीकृति के बिना इससे पूर्व राज्य सरकार ने कुछ बदलाव किए थे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अनधिकृत कालोनी के नियमन से जुड़े एक विशेषज्ञ अधिकारी का कहना है कि मास्टर प्लान, भूमि सुधार अधिनियम, भूस्वामी कानून, अग्नि सुरक्षा मानक कानून के प्रावधान को ऊपर विशेष कानून बनाकर संसद से पास कराए बिना कालोनियों का नियमन नहीं हो सकता है। इतना ही नहीं वर्तमान में जहां और जिस हाल में है कालोनी उसी तरह पास करनी होगी, नानावती आयोग ने भी यही सिफारिश दी थी।
शहरी विकास विभाग ने केन्द्र को चिट्ठी भेजकर प्रत्येक कालोनी में 6 मीटर चौड़ी सड़क और कम से कम 32 वर्ग मीटर प्लाट की अनिवार्यता खत्म करने की छूट मांगी गई। इतना ही नहीं 50 फीसदी निर्माण के मामले में 450 कालोनियां फंस रहीं थी। इतना ही नहीं सरकारी जमीन पर सर्किल रेट और फिर जुर्माना लेने की दिक्कत भी बरकरार है।
अवैध कॉलोनियों पर आप ने साधा केंद्र पर निशाना
अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के मामले में आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। आप नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दिल्ली के साठ लाख लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि कॉलोनियां कैबिनेट के प्रस्ताव से नहीं, कानून लाने से नियमित होंगी। कैबिनेट के फैसले से न तो मकानों की रजिस्ट्री होगी, न नक्शा पास होगा और न ही इस पर होम लोन मिलेगा।