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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The dream of a developed India 2047 will be realised through education and training: Vice President

शिक्षा और प्रशिक्षण से विकसित भारत 2047 का सपना होगा साकार : उपराष्ट्रपति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 08:31 PM IST
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-जेएनयू के दीक्षांत समारोह में छात्रों से संवैधानिक मूल्यों और भारत की सभ्यतागत नैतिकता का पालन करने का आह्वान
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं बल्कि इसका उद्देश्य चरित्र निर्माण, बुद्धि को सुदृढ़ करना और व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। उचित शिक्षा और प्रशिक्षण ही भारत के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में सक्षम बनाएगा। सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के नौवें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने यह बातें कहीं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में 460 से अधिक पीएचडी शोधार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उपनिषदों और भगवद् गीता से लेकर कौटिल्य के अर्थशास्त्र और तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल तक भारतीय धर्मग्रंथों और प्राचीन पुस्तकों ने शिक्षा को सामाजिक और नैतिक जीवन के केंद्र में रखा। स्वामी विवेकानंद के कथन को संदर्भित करते हुए कहा कि शिक्षा से चरित्र निर्माण होना चाहिए।
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि बहस, चर्चा, असहमति और यहां तक कि टकराव भी एक स्वस्थ लोकतंत्र के आवश्यक तत्व हैं। अगर ऐसा है भी तो इन प्रक्रियाओं का एक निष्कर्ष पर पहुंचना अनिवार्य है।
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उन्होंने तमिल अध्ययन के विशेष केंद्र और असमिया, ओडि़या, मराठी और कन्नड़ में पाठ्यक्रमों और प्रोग्राम जैसी पहलों के माध्यम से भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए जेएनयू के निरंतर प्रयासों को भी बेहतर बताया।

जेएनयू विचारों, विमर्श की जीवंत प्रयोगशाला

दीक्षांत समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेएनयू की स्थापना अकादमिक उत्कृष्टता, स्वतंत्रता और स्वायत्ता के उद्देश्य से की गई थी। जेएनयू देश के उन शुरुआती विश्वविद्यालयों में शामिल रहा जिसने इंटरडिसिप्लिनरी अध्ययन और क्रेडिट-आधारित शिक्षा प्रणाली को अपनाया। जेएनयू केवल कक्षा और पुस्तकालय तक सीमित नहीं है बल्कि यह विचारों, विमर्श और असहमति की जीवंत प्रयोगशाला है। आलोचनात्मक सोच जेएनयू की आत्मा है और यहीं लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।


विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में करेंगे योगदान


जेएनयू के कुलगुरु प्रो. शांतिश्री डी. पंडित ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली, सुरक्षा अध्ययन, समुद्री अध्ययन और अनुसंधान के नए केंद्रों के माध्यम से जेएनयू विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में वैचारिक और अकादमिक नेतृत्व प्रदान करेगा। जेएनयू को एनएएसी में ए++ ग्रेड मिला है और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति लगातार सुधरी है। जेएनयू में 14 स्कूल, 9 विशेष केंद्र, 80 पीएचडी कार्यक्रम और हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। कुलगुरु ने स्वामी विवेकानंद के संदेश उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको के साथ छात्रों को प्रेरित किया।
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